गैरसैंण। उत्तराखंड में नियमों को ताक पर रखकर गैर-कानूनी धार्मिक शिक्षा देने वाले शैक्षणिक संस्थानों के खिलाफ धामी सरकार ने पूरी तरह शिकंजा कस दिया है। गैरसैंण में चल रहे विधानसभा सत्र के दौरान सरकार ने ‘उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम (संशोधन) विधेयक’ सदन में पेश कर दिया है। इस नए कानून के तहत नियमों का उल्लंघन कर धार्मिक शिक्षा देने वाले संस्थानों पर 5 लाख रुपये तक का भारी जुर्माना लगाया जाएगा और संस्थान पर ताला जड़ दिया जाएगा।
सदन में पेश किए गए नए संशोधन विधेयक के अनुसार, राज्य में शैक्षणिक संस्थानों को स्पष्ट रूप से दो अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया गया है। कक्षा 8 तक की शिक्षा के लिए सरकार द्वारा अधिकृत सक्षम अधिकारी से मान्यता लेना अनिवार्य होगा। वहीं, कक्षा 9 से 12 तक के स्कूलों को उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद से संबद्धता लेना अनिवार्य कर दिया गया है।
विधेयक में कड़े प्रावधान शामिल करते हुए यह साफ किया गया है कि यदि कोई संस्थान तय शर्तों का उल्लंघन करता है, तो जांच के बाद उस पर सीधी कार्रवाई होगी। अवैध रूप से संचालित पाए जाने पर संस्थान को तुरंत सील किया जा सकेगा और 5 लाख रुपये तक का अर्थदंड वसूला जाएगा।
गंभीर मामलों या आपराधिक कृत्य सामने आने पर तुरंत एफआईआर दर्ज की जाएगी, हालांकि कार्रवाई से पहले संस्थान को अपना पक्ष रखने का मौका मिलेगा। सरकार की मंशा साफ है कि राज्य के किसी भी हिस्से में बिना मान्यता के धार्मिक या सामान्य शिक्षा का संचालन न हो सके।सरकार के इस कड़े रुख से पूरे प्रदेश के गैर-मान्यता प्राप्त और अनियमित शैक्षणिक संस्थानों में हड़कंप मच गया है।

