उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ में विशेष गहन पुनरीक्षण SIR अभियान ने नेपाल से शादी कर लाई गईं बहुओं और उनके परिवारों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। वर्तमान नियमों के तहत भारतीय नागरिकता न मिल पाने के कारण इन नेपाली मूल की बहुओं का नाम स्थानीय मतदाता सूची में दर्ज नहीं किया जा सकेगा, जिससे वे मतदान करने के अधिकार से पूरी तरह वंचित हो जाएंगी।
एक अनुमान के मुताबिक, पिथौरागढ़ जिले में भारत से रिश्ता जोड़ने के बाद भी करीब डेढ़ हजार से अधिक ऐसी नेपाली बहुएं हैं, जिन्हें इस बार वोट डालने का मौका नहीं मिलेगा। इस गंभीर विषय को लेकर बुधवार को स्थानीय संगठनों के लोग कलेक्ट्रेट पहुंचे और एडीएम से मुलाकात कर केंद्र सरकार के स्तर पर इस समस्या का उचित समाधान निकालने की पुरजोर मांग की।
इस पूरे मामले पर प्रशासनिक पक्ष रखते हुए पिथौरागढ़ के एडीएम योगेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में विवाह कर लाई गईं नेपाली मूल की युवतियों को तुरंत भारतीय नागरिकता मिलने में तकनीकी बाधाएं आ रही हैं। जब तक उन्हें नागरिकता नहीं मिल जाती, तब तक वे भारत की वैधानिक मतदाता नहीं बन सकतीं।
एसआईआर के तहत मतदाता सूची का पुनरीक्षण करने के लिए प्रशासन पूरी तरह से सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों और नियमों का पालन करने के लिए बाध्य है। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि इस संवेदनशील मामले में केंद्र या राज्य सरकार आगे जो भी नए दिशा-निर्देश तय करेगी, स्थानीय प्रशासन उसी के अनुरूप आगे का कोई भी निर्णय लेगा।
व्यापारी दीपक जोशी के नेतृत्व में कलेक्ट्रेट पहुंचे विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने इस बात पर गहरा दुख व्यक्त किया कि भारत और नेपाल के बीच सदियों से रोटी-बेटी के बेहद आत्मीय और पारंपरिक संबंध रहे हैं। जिले के बहुत से परिवारों ने नेपाल में शादियां की हैं और आज बड़ी संख्या में नेपाली बहुएं यहां के समाज का अभिन्न हिस्सा बन चुकी हैं।
इसके बावजूद, विवाह के लंबे समय बाद भी न तो उनका आधार कार्ड बन पा रहा है और न ही पहचान से जुड़े अन्य जरूरी दस्तावेज तैयार हो रहे हैं। सामाजिक संगठनों ने एडीएम के माध्यम से केंद्र सरकार से इस मानवीय और पारिवारिक मुद्दे पर तुरंत वार्ता करने की अपील की है, ताकि इन विवाहिताओं का नाम मतदाता सूची में शामिल कर उन्हें लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जा सके।

