दून अस्पताल में आयुष्मान योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा, अब भर्ती मरीजों की कलाई पर लगेगा ‘पहचान टैग’

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देहरादून के प्रसिद्ध दून अस्पताल में आयुष्मान योजना के तहत एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने भविष्य की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बेहद कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। इस मामले के उजागर होने के बाद अस्पताल प्रशासन ने अब आयुष्मान योजना के अंतर्गत भर्ती होने वाले सभी मरीजों की कलाई पर निजी अस्पतालों की तर्ज पर एक विशेष पहचान टैग लगाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है, जिसे मरीज को अस्पताल से छुट्टी मिलने के समय ही हटाया जाएगा।

इस गंभीर धोखाधड़ी के पकड़े जाने के बाद मुख्य आरोपी मंजीत ने अपने कृत्य के लिए माफीनामा देते हुए इलाज के मद में 1.35 लाख रुपये अस्पताल में जमा करवा दिए हैं। अस्पताल प्रबंधन ने इस पूरे घटनाक्रम और हुई रिकवरी की लिखित सूचना पुलिस को अग्रिम कानूनी कार्रवाई के लिए भेज दी है।

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अस्पताल की प्राचार्या डॉ. गीता जैन एवं एमएस डॉ. आरएस बिष्ट के कड़े निर्देशों के बाद अब मरीजों की निगरानी और उनके वास्तविक सत्यापन की व्यवस्था को अभेद्य बनाया जा रहा है। इसके तहत अब अस्पताल के वार्डों में भर्ती होने वाले प्रत्येक आयुष्मान मरीज की मुख्य चिकित्सा फाइल में उनके आधार कार्ड और आयुष्मान कार्ड की फोटोकॉपी लगाना अनिवार्य कर दिया गया है ताकि वार्ड स्टाफ और डॉक्टरों द्वारा किसी भी समय उनका भौतिक सत्यापन किया जा सके।

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इसके अलावा, इस पूरी व्यवस्था को पारदर्शी और त्रुटिहीन बनाने के लिए नर्सिंग प्रभारियों और आयुष्मान मित्रों का एक विशेष समन्वय ग्रुप बनाया जा रहा है, जिससे अस्पताल के भीतर किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत रोक लगाई जा सके।

अस्पताल के डिप्टी एमएस डॉ. एनएस बिष्ट के अनुसार, आरोपी मंजीत ने अस्पताल प्रणाली को धोखा देकर किसी अन्य के नाम पर इलाज कराने की कोशिश की थी, जिसे पकड़ने के बाद उसकी पुरानी फाइल को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया और नए सिरे से विक्की नामक वास्तविक मरीज की फाइल बनाकर नियम अनुसार राशि जमा कराई गई।

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इस पूरे मामले को स्थानीय समाचार पत्र ‘हिन्दुस्तान’ द्वारा प्रमुखता से उठाए जाने के बाद अस्पताल प्रशासन ने अपनी पूर्व की कोताही को स्वीकार करते हुए सभी डॉक्टरों और चिकित्साकर्मियों को मरीजों के दाखिले के समय अत्यधिक सतर्कता बरतने के कड़े निर्देश जारी किए हैं। अस्पताल प्रबंधन द्वारा दर्ज कराए गए इस केस में अब पुलिस गहराई से जांच कर रही है ताकि भविष्य में आयुष्मान योजना के बजट का ऐसा दुरुपयोग दोबारा न हो सके।

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