युवा मामले एवं खेल मंत्रालय के युवा मामलों के विभाग ने ‘मेरा युवा भारत’ के माध्यम से वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम 2026 के पहले चरण की शुरुआत कर दी है। यह एक अनूठी और दूरदर्शी युवा नेतृत्व वाली पहल है, जिसका मुख्य उद्देश्य देश के सुदूर सीमावर्ती गांवों में सतत विकास को बढ़ावा देना, जमीनी स्तर पर जन-भागीदारी को मजबूत करना और राष्ट्रीय एकता की भावना को गहरा करना है।
कुल दो चरणों में चलने वाले इस विशेष कार्यक्रम के तहत देश के होनहार युवाओं को सीमांत क्षेत्रों की वास्तविकताओं से रूबरू होने और राष्ट्र निर्माण में सीधे योगदान देने का एक ऐतिहासिक अवसर मिल रहा है। यह पूरी कवायद गृह मंत्रालय और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के साझा सहयोग से आगे बढ़ रही है, जो साल 2047 तक एक आत्मनिर्भर और ‘विकसित भारत’ के सपने को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
राष्ट्रव्यापी चयन और युवाओं की तैनाती
इस ऐतिहासिक कार्यक्रम का हिस्सा बनने के लिए देश भर के युवाओं में भारी उत्साह देखा गया, जहां एक राष्ट्रव्यापी ऑनलाइन क्विज़ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था। इस प्रतियोगिता में 3 लाख से अधिक युवाओं ने अपनी किस्मत आजमाई, जिनमें से कड़ी प्रतिस्पर्धा के बाद कुल 500 उत्कृष्ट ‘MY BHARAT’ स्वयंसेवकों का चयन किया गया।
ये स्वयंसेवक भारत के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिन्हें लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के चिन्हित सीमावर्ती गांवों में भेजा जा रहा है। वर्तमान में शुरू हुए पहले चरण के तहत 250 स्वयंसेवक 43 गांवों में विभिन्न गहन गतिविधियों का संचालन कर रहे हैं, जबकि शेष 250 स्वयंसेवकों का दूसरा जत्था इसी महीने के अंत में 50 अन्य गांवों में जाकर कमान संभालेगा।
यह कार्यक्रम शहरी और ग्रामीण युवाओं को सीमावर्ती क्षेत्रों के स्थानीय समुदायों के साथ सीधे जुड़ने और उनके साथ रहने का एक विरल अवसर प्रदान करता है। सात दिनों के इस बेहद गहन और संरचित प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान स्वयंसेवकों को सीमा जागरूकता, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, सामुदायिक जीवन, स्थानीय शासन और राष्ट्रीय एकता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर तैयार किया जा रहा है।
ये युवा जमीनी स्तर पर स्थानीय ग्रामीणों, पंचायती राज संस्थाओं, प्रशासनिक अधिकारियों और सीमा पर तैनात सुरक्षा कर्मियों के साथ लगातार संवाद कर रहे हैं। इस परस्पर बातचीत के जरिए प्रतिभागी इन रणनीतिक क्षेत्रों की सामाजिक-आर्थिक वास्तविकताओं, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और वहां की विकासात्मक आकांक्षाओं को बहुत करीब से समझ रहे हैं। इसके साथ ही वे गांवों में जाकर घरेलू सर्वेक्षण कर रहे हैं, ग्राम सभा की बैठकों में हिस्सा ले रहे हैं, और स्वच्छता व पर्यावरण संरक्षण अभियानों के माध्यम से विकास के नए अवसरों की पहचान करने में जुटे हैं।
‘नेशन फर्स्ट चैलेंज’ और जागरूकता अभियान
इस पूरे अभियान का एक सबसे महत्वपूर्ण और रणनीतिक हिस्सा ‘नेशन फर्स्ट चैलेंज’ का व्यापक प्रचार-प्रसार करना है। यह एक ऐसा राष्ट्रव्यापी आंदोलन है जो देश के प्रत्येक नागरिक में जिम्मेदार नागरिकता की भावना और पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली को बढ़ावा देता है। एमवाई भारत के ये युवा स्वयंसेवक इस अभियान के पांच प्रमुख स्तंभों को आम जनमानस तक पहुंचाने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।
इन पांच मुख्य क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर बने स्वदेशी उत्पादों को अपनाना, स्वास्थ्यवर्धक पारंपरिक खाना पकाने की विधियों का प्रसार, ईंधन संरक्षण के लिए सार्वजनिक परिवहन का अधिक से अधिक उपयोग, रसायनों से मुक्त प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना और स्थानीय पर्यटन को पुरजोर समर्थन देना शामिल है। सामुदायिक संपर्क कार्यक्रमों के माध्यम से ये युवा ग्रामीणों को इन राष्ट्र-केंद्रित और पर्यावरण के प्रति जवाबदेह प्रथाओं को अपने दैनिक जीवन में ढालने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

