देहरादून। उत्तराखंड के विकासनगर स्थित चकराता तहसील में सरकारी धन के गबन का बड़ा मामला सामने आया है। उप निबंधक कार्यालय के 19,81,471 रुपये के पंजीकरण शुल्क में हेराफेरी करने के आरोप में कनिष्ठ लिपिक कार्तिक चौहान के खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है। सीओ विकासनगर विवेक कुटियाल ने बताया कि यह कार्रवाई तहसीलदार एवं उप निबंधक सुशीला कोठियाल की ओर से दी गई लिखित शिकायत के आधार पर की गई है। इस प्रशासनिक खुलासे के बाद से विभागीय गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है।
पुलिस में दर्ज शिकायत के मुताबिक, आरोपी कनिष्ठ लिपिक चकराता तहसील में तैनात रहने के साथ-साथ उप निबंधक कार्यालय के कामकाज का जिम्मा भी संभाल रहा था। आरोपी पर आरोप है कि वह भूमि व विलेखों के पंजीकरण शुल्क के चालान और संबंधित दस्तावेज समय पर अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत नहीं करता था। अधिकारियों द्वारा बार-बार ताकीद किए जाने के बावजूद उसने सरकारी राजस्व को नियमानुसार खाते में जमा नहीं कराया।
जांच में सामने आया कि कुल 19,81,471 रुपये की फीस के सापेक्ष आरोपी लिपिक ने लगभग छह महीने से अधिक समय तक धनराशि अपने पास दबाए रखी। जब मामला उच्चाधिकारियों के संज्ञान में आया और जांच शुरू हुई, तब आरोपी ने दबाव में आकर 15,26,307 रुपये जमा कराए।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, गबन की गई रकम में से अभी भी 4,55,164 रुपये जमा कराया जाना बाकी है। सरकारी धन का दुरुपयोग करने और पद का गलत इस्तेमाल कर आपराधिक विश्वासघात करने पर आरोपी के खिलाफ सख्त धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है।
मामला दर्ज करने के बाद पुलिस और राजस्व विभाग की टीम पूरे केस की तकनीकी व वित्तीय जांच में जुट गई है। अधिकारियों का कहना है कि बैंक रिकॉर्ड्स और चालान की फोरेंसिक जांच के बाद आरोपी लिपिक पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।

