उत्तराखंड में आयुर्वेद डॉक्टरों का बड़ा आंदोलन: 8 जून से चरणबद्ध कार्य बहिष्कार

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उत्तराखंड राजकीय आयुर्वेद एवं यूनानी चिकित्सा सेवा संघ ने शासन स्तर पर हो रही लगातार उपेक्षा और सालों से लंबित पड़ी अपनी जायज मांगों के समर्थन में पूरे प्रदेश में एक बड़े चरणबद्ध आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। आयुष विभाग में कार्यरत चिकित्साधिकारी लंबे समय से प्रशासनिक उदासीनता का शिकार हैं और सरकार के साथ कई दौर की वार्ताएं विफल होने के बाद अब डॉक्टरों ने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है।

संघ द्वारा तैयार की गई रूपरेखा के अनुसार, यह विरोध प्रदर्शन पूरी तरह से चरणबद्ध होगा, जिसकी शुरुआत शुरुआती तीन दिनों (8 से 10 जून) तक सभी डॉक्टरों द्वारा बाजू पर काली पट्टी बांधकर सांकेतिक रूप से दर्ज कराई जाएगी। इसके बाद, 11 और 12 जून को अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं तो चालू रखी जाएंगी, लेकिन विरोध स्वरूप विभिन्न आंदोलनात्मक गतिविधियां जारी रहेंगी।

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आंदोलन के अगले चरण में 13 जून को पूरे प्रदेश में ओपीडी सेवाओं का पूर्ण बहिष्कार किया जाएगा और जिला मुख्यालयों पर उग्र धरना-प्रदर्शन होगा। यदि इसके बावजूद धामी सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो 15 जून से राज्य के सभी आयुर्वेद डॉक्टर पूर्ण कार्य बहिष्कार करते हुए आयुष निदेशालय में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ जाएंगे, जिसकी लिखित सूचना आयुष सचिव को पहले ही भेजी जा चुकी है।

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चिकित्सकों की इस नाराजगी के पीछे कई महत्वपूर्ण सेवा संबंधी मांगें शामिल हैं, जिनमें नई नियुक्तियां, एसीपी (एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन) के लंबित मामलों का निपटारा, विभागीय ढांचे का पुनर्गठन, पदोन्नति के अवसरों का विस्तार, अध्ययन अवकाश से जुड़ी विसंगतियों को दूर करना और संविदा डॉक्टरों का स्थायीकरण मुख्य है।

डॉक्टरों का विशेष रूप से आरोप है कि वर्ष 2022 में कैबिनेट से स्वीकृत हो चुके डीएसीपी (डायनेमिक एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन) के लाभ को आज तक शासनादेश जारी न करके अटकाया गया है। इसके अतिरिक्त, संघ मोबाइल ऐप आधारित उपस्थिति और बायोमेट्रिक व्यवस्था को सीधे वेतन से जोड़ने का कड़ा विरोध कर रहा है, क्योंकि राज्य के अधिकांश आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सालय अत्यंत दुर्गम और सुदूर पर्वतीय क्षेत्रों में स्थित हैं।

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जहां आए दिन नेटवर्क, खराब इंटरनेट कनेक्टिविटी और बिजली जैसी बुनियादी तकनीकी संसाधनों की भारी कमी रहती है; ऐसे में इस अव्यावहारिक व्यवस्था के कारण विपरीत परिस्थितियों में सेवा दे रहे डॉक्टरों का वेतन कटना पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है।

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