उत्तराखंड राज्य की जनभावनाओं और क्षेत्रीय अस्मिता से जुड़े सबसे संवेदनशील मुद्दे ‘गैरसैंण को स्थाई राजधानी घोषित करने’ की मांग को लेकर एक बार फिर जनआंदोलन की सुगबुगाहट तेज हो गई है। ‘स्थायी राजधानी गैरसैंण समिति’ के बैनर तले रविवार को राजधानी देहरादून की सड़कों पर एक विशाल और शांतिपूर्ण पैदल यात्रा निकाली गई। यह पैदल यात्रा मुख्य रूप से विधानसभा भवन क्षेत्र से शुरू होकर डिफेंस कॉलोनी और तीन बड़ चौक होते हुए वापस पुनः विधानसभा भवन क्षेत्र तक पहुंची।
इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य राज्य सरकार सोई हुई चेतना को जगाना और आम जनता को इस महत्वपूर्ण मुहिम के प्रति जागरूक करना था। यात्रा के दौरान समिति के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने स्थानीय निवासियों तथा राहगीरों को पर्चे बांटकर गैरसैंण के पक्ष में व्यापक जनसमर्थन जुटाया और पूरे रास्ते गैरसैंण को स्थाई राजधानी बनाने के समर्थन में गगनभेदी नारे लगाए।
समिति के नेताओं ने राज्य सरकार की नीतियों पर गहरा असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि उत्तराखंड राज्य गठन के 25 वर्ष बीत जाने के बाद भी यहां की जनता को अपनी स्थाई राजधानी के लिए तरसना पड़ रहा है, जो कि बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। आंदोलनकारियों ने पुरजोर शब्दों में कहा कि गैरसैंण केवल एक भौगोलिक स्थान नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड राज्य आंदोलन की मूल भावना, शहीदों के सपनों और पहाड़ के स्वाभिमान का साक्षात प्रतीक है।
इस जन-जागरण अभियान के माध्यम से सरकार से बेहद कड़े लहजे में मांग की गई कि वह गैरसैंण को लेकर अपनी ढुलमुल नीति को छोड़े और इस विषय पर एक स्पष्ट नीति के साथ-साथ एक समयबद्ध रोडमैप तुरंत जारी करे। इसके साथ ही, वक्ताओं ने उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों से लगातार हो रहे भारी पलायन और मैदानी व पहाड़ी क्षेत्रों के बीच बढ़ते क्षेत्रीय असंतुलन पर भी गहरी चिंता व्यक्त की।
इस सफल पदयात्रा के समापन पर समिति ने आंदोलन की धार को और तेज करने के लिए आगामी14 जून को ‘नेक्स्ट जेनरेशन लीडरशिप यात्रा’ समेत कई अन्य बड़े जन-जागरण कार्यक्रमों को आयोजित करने की महत्वपूर्ण घोषणा भी की।
इस ऐतिहासिक पैदल यात्रा का नेतृत्व और संचालन मुख्य रूप से संयोजक विनोद प्रसाद रतूड़ी, सचिन थपलियाल, पार्थ रतूड़ी, मनमोहन शर्मा, सुरेश रमोला, अनिल बहुगुणा, प्रकाश थपलियाल, जगदीश ममगाईं, एसएस ममगाईं और अजय नेगी जैसे समर्पित सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा किया गया।

