उत्तराखंड स्पेशल टास्क फोर्स ने देशभर में होने वाली करोड़ो रुपये की साइबर ठगी की रकम को ठिकाने लगाने वाले एक बहुत बड़े अंतरराज्यीय ‘म्यूल अकाउंट’ नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। STF ने इस काले कारोबार के मुख्य केंद्र बिंदु हरिद्वार जिले के लक्सर क्षेत्र से जुड़े आरोपी आरिफ और उसके अन्य अज्ञात साथियों के खिलाफ देहरादून साइबर थाने में धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
पुलिस जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि यह गिरोह बेहद शातिर तरीके से गरीब, सीधे-साधे और मजदूर वर्ग के लोगों को सरकारी योजनाओं का आर्थिक लाभ दिलाने का लालच देता था। इसके बाद उनके नाम पर फर्जी तरीके से बैंक खाते खुलवाकर उनके एटीएम कार्ड, पासबुक, चेकबुक और सिम कार्ड अपने कब्जे में ले लेता था।
इन बैंक खातों का इस्तेमाल निवेश धोखाधड़ी, डिजिटल अरेस्ट, शेयर ट्रेडिंग फ्रॉड और टास्क फ्रॉड जैसे गंभीर साइबर अपराधों से लूटी गई रकम को देश के अलग-अलग हिस्सों में ट्रांसफर करने और उसे सुरक्षित ठिकाने लगाने के लिए किया जा रहा था।
STF के एसएसपी अजय सिंह ने मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि शुरुआती जांच के दौरान इन संदिग्ध खातों के ट्रांजैक्शन पैटर्न और मनी ट्रेल के विश्लेषण से पता चला है कि खातों में जैसे ही ठगी की रकम आती थी, उसे तुरंत नकद निकाल लिया जाता था या दूसरे लेयर के खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था, ताकि असली अपराधियों तक पहुंचना मुश्किल हो सके। ‘
इस गिरोह के तार बिहार, केरल, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे राज्यों से भी जुड़े मिले हैं, जहां से लगातार साइबर धोखाधड़ी की शिकायतें मिल रही थीं। एसटीएफ ने इस रैकेट के खिलाफ चौतरफा कार्रवाई करते हुए पिछले दो दिनों में ही चार नए मुकदमे दर्ज किए हैं, और महज एक महीने के भीतर कुल छह मुकदमों में 10 नामजद आरोपियों सहित कई अज्ञात अपराधियों के खिलाफ शिकंजा कसा जा चुका है।
इस बड़ी कामयाबी के बीच, उत्तराखंड एसटीएफ ने आम जनता को साइबर फ्रॉड से बचाने में भी बड़ी सफलता हासिल की है। राष्ट्रीय वित्तीय हेल्पलाइन ‘1930’ कंट्रोल रूम और एसटीएफ की सोशल मीडिया रिस्पॉन्स टीम की त्वरित कार्रवाई के चलते मई 2026 के दौरान साइबर ठगी के शिकार हुए मासूम लोगों के करीब 2.24 करोड़ रुपये समय रहते बैंकों में होल्ड करा दिए गए हैं, जबकि पीड़ितों के खातों में 7.74 लाख रुपये की धनराशि सुरक्षित वापस भी करा दी गई है।
SSP अजय सिंह ने जनता से बेहद भावुक और सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा है कि कोई भी नागरिक किसी भी प्रकार के कमीशन या लालच में आकर अपना बैंक खाता, सिम कार्ड या पासबुक किसी अन्य अज्ञात व्यक्ति को किराए पर न दें, क्योंकि ऐसा करना आपको सीधे अपराधी की श्रेणी में खड़ा कर सकता है।
उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की वित्तीय साइबर धोखाधड़ी होने पर तुरंत ‘1930’ हेल्पलाइन नंबर या भारत सरकार के आधिकारिक पोर्टल www.cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं ताकि समय रहते आपकी गाढ़ी कमाई को डूबने से बचाया जा सके।
उत्तराखंड स्पेशल टास्क फोर्स ने देशभर में होने वाली करोड़ो रुपये की साइबर ठगी की रकम को ठिकाने लगाने वाले एक बहुत बड़े अंतरराज्यीय ‘म्यूल अकाउंट’ नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। STF ने इस काले कारोबार के मुख्य केंद्र बिंदु हरिद्वार जिले के लक्सर क्षेत्र से जुड़े आरोपी आरिफ और उसके अन्य अज्ञात साथियों के खिलाफ देहरादून साइबर थाने में धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
पुलिस जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि यह गिरोह बेहद शातिर तरीके से गरीब, सीधे-साधे और मजदूर वर्ग के लोगों को सरकारी योजनाओं का आर्थिक लाभ दिलाने का लालच देता था। इसके बाद उनके नाम पर फर्जी तरीके से बैंक खाते खुलवाकर उनके एटीएम कार्ड, पासबुक, चेकबुक और सिम कार्ड अपने कब्जे में ले लेता था।
इन बैंक खातों का इस्तेमाल निवेश धोखाधड़ी, डिजिटल अरेस्ट, शेयर ट्रेडिंग फ्रॉड और टास्क फ्रॉड जैसे गंभीर साइबर अपराधों से लूटी गई रकम को देश के अलग-अलग हिस्सों में ट्रांसफर करने और उसे सुरक्षित ठिकाने लगाने के लिए किया जा रहा था।
STF के एसएसपी अजय सिंह ने मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि शुरुआती जांच के दौरान इन संदिग्ध खातों के ट्रांजैक्शन पैटर्न और मनी ट्रेल के विश्लेषण से पता चला है कि खातों में जैसे ही ठगी की रकम आती थी, उसे तुरंत नकद निकाल लिया जाता था या दूसरे लेयर के खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था, ताकि असली अपराधियों तक पहुंचना मुश्किल हो सके। ‘
इस गिरोह के तार बिहार, केरल, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे राज्यों से भी जुड़े मिले हैं, जहां से लगातार साइबर धोखाधड़ी की शिकायतें मिल रही थीं। एसटीएफ ने इस रैकेट के खिलाफ चौतरफा कार्रवाई करते हुए पिछले दो दिनों में ही चार नए मुकदमे दर्ज किए हैं, और महज एक महीने के भीतर कुल छह मुकदमों में 10 नामजद आरोपियों सहित कई अज्ञात अपराधियों के खिलाफ शिकंजा कसा जा चुका है।
इस बड़ी कामयाबी के बीच, उत्तराखंड एसटीएफ ने आम जनता को साइबर फ्रॉड से बचाने में भी बड़ी सफलता हासिल की है। राष्ट्रीय वित्तीय हेल्पलाइन ‘1930’ कंट्रोल रूम और एसटीएफ की सोशल मीडिया रिस्पॉन्स टीम की त्वरित कार्रवाई के चलते मई 2026 के दौरान साइबर ठगी के शिकार हुए मासूम लोगों के करीब 2.24 करोड़ रुपये समय रहते बैंकों में होल्ड करा दिए गए हैं, जबकि पीड़ितों के खातों में 7.74 लाख रुपये की धनराशि सुरक्षित वापस भी करा दी गई है।
SSP अजय सिंह ने जनता से बेहद भावुक और सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा है कि कोई भी नागरिक किसी भी प्रकार के कमीशन या लालच में आकर अपना बैंक खाता, सिम कार्ड या पासबुक किसी अन्य अज्ञात व्यक्ति को किराए पर न दें, क्योंकि ऐसा करना आपको सीधे अपराधी की श्रेणी में खड़ा कर सकता है।
उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की वित्तीय साइबर धोखाधड़ी होने पर तुरंत ‘1930’ हेल्पलाइन नंबर या भारत सरकार के आधिकारिक पोर्टल www.cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं ताकि समय रहते आपकी गाढ़ी कमाई को डूबने से बचाया जा सके।
उत्तराखंड स्पेशल टास्क फोर्स ने देशभर में होने वाली करोड़ो रुपये की साइबर ठगी की रकम को ठिकाने लगाने वाले एक बहुत बड़े अंतरराज्यीय ‘म्यूल अकाउंट’ नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। STF ने इस काले कारोबार के मुख्य केंद्र बिंदु हरिद्वार जिले के लक्सर क्षेत्र से जुड़े आरोपी आरिफ और उसके अन्य अज्ञात साथियों के खिलाफ देहरादून साइबर थाने में धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
पुलिस जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि यह गिरोह बेहद शातिर तरीके से गरीब, सीधे-साधे और मजदूर वर्ग के लोगों को सरकारी योजनाओं का आर्थिक लाभ दिलाने का लालच देता था। इसके बाद उनके नाम पर फर्जी तरीके से बैंक खाते खुलवाकर उनके एटीएम कार्ड, पासबुक, चेकबुक और सिम कार्ड अपने कब्जे में ले लेता था।
इन बैंक खातों का इस्तेमाल निवेश धोखाधड़ी, डिजिटल अरेस्ट, शेयर ट्रेडिंग फ्रॉड और टास्क फ्रॉड जैसे गंभीर साइबर अपराधों से लूटी गई रकम को देश के अलग-अलग हिस्सों में ट्रांसफर करने और उसे सुरक्षित ठिकाने लगाने के लिए किया जा रहा था।
STF के एसएसपी अजय सिंह ने मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि शुरुआती जांच के दौरान इन संदिग्ध खातों के ट्रांजैक्शन पैटर्न और मनी ट्रेल के विश्लेषण से पता चला है कि खातों में जैसे ही ठगी की रकम आती थी, उसे तुरंत नकद निकाल लिया जाता था या दूसरे लेयर के खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था, ताकि असली अपराधियों तक पहुंचना मुश्किल हो सके। ‘
इस गिरोह के तार बिहार, केरल, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे राज्यों से भी जुड़े मिले हैं, जहां से लगातार साइबर धोखाधड़ी की शिकायतें मिल रही थीं। एसटीएफ ने इस रैकेट के खिलाफ चौतरफा कार्रवाई करते हुए पिछले दो दिनों में ही चार नए मुकदमे दर्ज किए हैं, और महज एक महीने के भीतर कुल छह मुकदमों में 10 नामजद आरोपियों सहित कई अज्ञात अपराधियों के खिलाफ शिकंजा कसा जा चुका है।
इस बड़ी कामयाबी के बीच, उत्तराखंड एसटीएफ ने आम जनता को साइबर फ्रॉड से बचाने में भी बड़ी सफलता हासिल की है। राष्ट्रीय वित्तीय हेल्पलाइन ‘1930’ कंट्रोल रूम और एसटीएफ की सोशल मीडिया रिस्पॉन्स टीम की त्वरित कार्रवाई के चलते मई 2026 के दौरान साइबर ठगी के शिकार हुए मासूम लोगों के करीब 2.24 करोड़ रुपये समय रहते बैंकों में होल्ड करा दिए गए हैं, जबकि पीड़ितों के खातों में 7.74 लाख रुपये की धनराशि सुरक्षित वापस भी करा दी गई है।
SSP अजय सिंह ने जनता से बेहद भावुक और सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा है कि कोई भी नागरिक किसी भी प्रकार के कमीशन या लालच में आकर अपना बैंक खाता, सिम कार्ड या पासबुक किसी अन्य अज्ञात व्यक्ति को किराए पर न दें, क्योंकि ऐसा करना आपको सीधे अपराधी की श्रेणी में खड़ा कर सकता है।
उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की वित्तीय साइबर धोखाधड़ी होने पर तुरंत ‘1930’ हेल्पलाइन नंबर या भारत सरकार के आधिकारिक पोर्टल www.cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं ताकि समय रहते आपकी गाढ़ी कमाई को डूबने से बचाया जा सके।
उत्तराखंड स्पेशल टास्क फोर्स ने देशभर में होने वाली करोड़ो रुपये की साइबर ठगी की रकम को ठिकाने लगाने वाले एक बहुत बड़े अंतरराज्यीय ‘म्यूल अकाउंट’ नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। STF ने इस काले कारोबार के मुख्य केंद्र बिंदु हरिद्वार जिले के लक्सर क्षेत्र से जुड़े आरोपी आरिफ और उसके अन्य अज्ञात साथियों के खिलाफ देहरादून साइबर थाने में धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
पुलिस जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि यह गिरोह बेहद शातिर तरीके से गरीब, सीधे-साधे और मजदूर वर्ग के लोगों को सरकारी योजनाओं का आर्थिक लाभ दिलाने का लालच देता था। इसके बाद उनके नाम पर फर्जी तरीके से बैंक खाते खुलवाकर उनके एटीएम कार्ड, पासबुक, चेकबुक और सिम कार्ड अपने कब्जे में ले लेता था।
इन बैंक खातों का इस्तेमाल निवेश धोखाधड़ी, डिजिटल अरेस्ट, शेयर ट्रेडिंग फ्रॉड और टास्क फ्रॉड जैसे गंभीर साइबर अपराधों से लूटी गई रकम को देश के अलग-अलग हिस्सों में ट्रांसफर करने और उसे सुरक्षित ठिकाने लगाने के लिए किया जा रहा था।
STF के एसएसपी अजय सिंह ने मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि शुरुआती जांच के दौरान इन संदिग्ध खातों के ट्रांजैक्शन पैटर्न और मनी ट्रेल के विश्लेषण से पता चला है कि खातों में जैसे ही ठगी की रकम आती थी, उसे तुरंत नकद निकाल लिया जाता था या दूसरे लेयर के खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था, ताकि असली अपराधियों तक पहुंचना मुश्किल हो सके। ‘
इस गिरोह के तार बिहार, केरल, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे राज्यों से भी जुड़े मिले हैं, जहां से लगातार साइबर धोखाधड़ी की शिकायतें मिल रही थीं। एसटीएफ ने इस रैकेट के खिलाफ चौतरफा कार्रवाई करते हुए पिछले दो दिनों में ही चार नए मुकदमे दर्ज किए हैं, और महज एक महीने के भीतर कुल छह मुकदमों में 10 नामजद आरोपियों सहित कई अज्ञात अपराधियों के खिलाफ शिकंजा कसा जा चुका है।
इस बड़ी कामयाबी के बीच, उत्तराखंड एसटीएफ ने आम जनता को साइबर फ्रॉड से बचाने में भी बड़ी सफलता हासिल की है। राष्ट्रीय वित्तीय हेल्पलाइन ‘1930’ कंट्रोल रूम और एसटीएफ की सोशल मीडिया रिस्पॉन्स टीम की त्वरित कार्रवाई के चलते मई 2026 के दौरान साइबर ठगी के शिकार हुए मासूम लोगों के करीब 2.24 करोड़ रुपये समय रहते बैंकों में होल्ड करा दिए गए हैं, जबकि पीड़ितों के खातों में 7.74 लाख रुपये की धनराशि सुरक्षित वापस भी करा दी गई है।
SSP अजय सिंह ने जनता से बेहद भावुक और सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा है कि कोई भी नागरिक किसी भी प्रकार के कमीशन या लालच में आकर अपना बैंक खाता, सिम कार्ड या पासबुक किसी अन्य अज्ञात व्यक्ति को किराए पर न दें, क्योंकि ऐसा करना आपको सीधे अपराधी की श्रेणी में खड़ा कर सकता है।
उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की वित्तीय साइबर धोखाधड़ी होने पर तुरंत ‘1930’ हेल्पलाइन नंबर या भारत सरकार के आधिकारिक पोर्टल www.cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं ताकि समय रहते आपकी गाढ़ी कमाई को डूबने से बचाया जा सके।

