बद्रीनाथ में सूखने की कगार पर शेष नेत्र झील, PMO के संज्ञान के बाद एक्शन

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चमोली। बद्रीनाथ धाम में आने वाले तीर्थयात्रियों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रही ऐतिहासिक शेष नेत्र झील अब सूखने की कगार पर पहुंच गई है। हैरानी की बात यह है कि क्षेत्र में जारी लगातार बारिश के बावजूद इस झील का जलस्तर नहीं बढ़ पा रहा है। इस स्थिति पर प्रधानमंत्री कार्यालय ने सैटेलाइट तस्वीरों के जरिए संज्ञान लिया, जिसके बाद जिला प्रशासन तुरंत सतर्क हो गया है।

पीएमओ के निर्देश मिलते ही जिला प्रशासन ने झील की साफ-सफाई का काम युद्धस्तर पर शुरू कर दिया है। झील में जमा गाद और कचरे को हटाने की जिम्मेदारी बनारस की एक विशेषज्ञ संस्था को सौंपी गई है। इसके साथ ही इतिहास में पहली बार झील के स्थायी संरक्षण का जिम्मा जिला विकास प्राधिकरण को दिया गया है।

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बद्रीनाथ धाम में अराइवल प्लाजा के पास शेष नेत्र झील और माणा रोड पर बदरीश झील स्थित है। लंबे समय से इन झीलों के रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया गया था। हाल ही में सैटेलाइट तस्वीरों में जब झील में पानी बेहद कम होने और तलहटी में गाद जमा होने का खुलासा हुआ, तो पीएमओ ने स्थानीय प्रशासन से पूरी रिपोर्ट तलब की।

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झील का जलस्तर लगातार गिरने के कारणों की पड़ताल के लिए प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। अधिकारी यह भी जांच रहे हैं कि बद्रीनाथ मास्टर प्लान के तहत हो रहे भारी निर्माण कार्यों के कारण शेष नेत्र झील के प्राकृतिक जलस्रोत तो बंद या प्रभावित नहीं हुए हैं। इसके लिए स्थिति का वैज्ञानिक अध्ययन किया जा रहा है।

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दूसरी ओर, माणा रोड स्थित बदरीश झील की स्थिति भी चिंताजनक है, जहाँ पूरी झील में शैवाल जमा हो चुकी है। वहीं, अराइवल प्लाजा के पास स्थित शेष नेत्र झील के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है। प्रशासन अब दोनों झीलों की सफाई और उनके प्राकृतिक स्रोतों को बचाने के प्रयासों में जुटा है।

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