चमोली। विश्व प्रसिद्ध श्री बदरीनाथ धाम में भगवान नर-नारायण की जयंती का पावन पर्व धार्मिक परंपराओं और अपार श्रद्धा के साथ शुरू हो गया है। श्रावण मास शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर शुरू हुए दो दिवसीय उत्सव के पहले दिन भगवान की पावन उत्सव डोली माता मूर्ति मंदिर पहुंची। यहां श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। अब सोमवार को भगवान नर-नारायण अपने जन्मस्थल लीला ढूंगी प्रस्थान करेंगे।
दो दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान की शुरुआत रविवार सुबह मुख्य मंदिर परिसर में विशेष पूजा-अर्चना के साथ हुई। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती की मौजूदगी में धाम के मुख्य रावल श्री अमरनाथ नंबूदरी ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान नर-नारायण की मूर्ति को देवडोली में विराजमान कराया।
इसके बाद भगवान की देवडोली गाजे-बाजे और धार्मिक जयकारों के साथ माता मूर्ति मंदिर के लिए रवाना हुई। यात्रा मार्ग में आईटीबीपी कैंप के पास देश के अंतिम गांव माणा की महिला मंडल ने पुष्पवर्षा कर देवडोली का जोरदार स्वागत किया।
माता मूर्ति मंदिर पहुंचने पर नायब रावल श्री सूर्यराग नंबूदरी, धर्माधिकारी और वेदपाठियों ने भगवान नर-नारायण का विशेष जलाभिषेक और पूजन संपन्न कराया। इस दौरान बड़ी संख्या में पहुंचे भक्तों ने भगवान के दर्शन किए।
दिन का भोग लगने के बाद शाम को भगवान नर-नारायण की उत्सव मूर्ति वापस बदरीनाथ धाम लौट आई। इस पावन अवसर पर मंदिर समिति और स्थानीय लोगों की ओर से श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे का आयोजन भी किया गया।
सनातन मान्यताओं के अनुसार भगवान नर और नारायण सतयुग से ही बदरीनाथ धाम में स्थित पर्वत श्रृंखलाओं पर तपस्यारत हैं। इन्हें भगवान विष्णु का ही अवतार माना जाता है। इसी कारण हर साल धाम में नर-नारायण जयंती का यह पर्व परंपरा के अनुसार मनाया जाता है।
बीकेटीसी के मीडिया प्रभारी डॉ. हरीश गौड़ ने बताया कि सोमवार सुबह भगवान नर-नारायण की उत्सव डोली बामणी गांव और बदरीनाथ धाम का भ्रमण करेगी। इसके बाद डोली भगवान बदरीविशाल के जन्मस्थल लीला ढूंगी पहुंचेगी, जहां मुख्य अभिषेक और विशेष पूजा की जाएगी।
लीला ढूंगी में होने वाला यह पूजन नर-नारायण जयंती उत्सव का मुख्य आकर्षण रहेगा। इस समय पूरा बदरीनाथ धाम क्षेत्र भक्तिमय माहौल में रंगा हुआ है और श्रद्धालुओं में इस दो दिवसीय धार्मिक आयोजन को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है।

