उत्तराखंड के आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को पिछले चार महीनों से मानदेय का भुगतान नहीं हुआ है, जिससे नाराज होकर उत्तराखंड राज्य आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ ने आगामी एक जून से पूर्ण रूप से कलमबंद हड़ताल पर जाने का बड़ा फैसला लिया है। संघ की प्रदेश अध्यक्ष सुशीला खत्री ने बताया कि महिला बाल विकास विभाग के अंतर्गत काम करने वाली इन कार्यकर्ताओं को पहले से ही बेहद कम मानदेय मिलता है, और अब समय पर भुगतान न होने के कारण वे गंभीर मानसिक और आर्थिक संकट से जूझ रही हैं।
कार्यकर्ता अपनी नियमित विभागीय ड्यूटी के साथ-साथ जनगणना और एसआईआर जैसे महत्वपूर्ण सरकारी कार्यों में भी अपना पूरा योगदान दे रही हैं, लेकिन निदेशालय द्वारा हर बार बजट की कमी या तकनीकी दिक्कतों का बहाना बनाकर उन्हें टाल दिया जाता है। दूसरी तरफ, महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग के उप निदेशक विक्रम सिंह ने स्पष्ट किया है कि केंद्र सरकार से मिलने वाले मानदेय को जारी करने में कुछ तकनीकी बाधाएं आ रही हैं, जिसे कोषागार के सहयोग से जल्द ही ठीक करके कार्यकर्ताओं का बकाया मानदेय तुरंत जारी कर दिया जाएगा।
संविदा शिक्षक भी यूजीसी के न्यूनतम वेतन से वंचित
उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत एक और बड़ी समस्या सामने आई है, जहाँ हल्द्वानी में संविदा, तदर्थ और आउटसोर्स के माध्यम से नियुक्त शिक्षकों को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के मानकों के अनुरूप न्यूनतम वेतन का लाभ नहीं मिल पा रहा है। सेल्फ फाइनेंस बीएड कॉलेजों में कार्यरत सहायक और एसोसिएट प्रवक्ताओं का मानदेय साल 2016 के बाद से नहीं बढ़ाया गया है, जिसके चलते वर्तमान में उन्हें क्रमशः 26,250 रुपये और 36,750 रुपये ही मिल रहे हैं।
यह वेतन यूजीसी के तय मानकों से बेहद कम है, जिसके अनुसार सहायक प्रवक्ता का न्यूनतम वेतन 57,700 रुपये और एसोसिएट प्रवक्ता का मानदेय 1,31,400 रुपये होना अनिवार्य है। पिछले 18 वर्षों के लंबे सेवाकाल में सहायक प्रवक्ताओं के वेतन में मात्र 6250 रुपये और एसोसिएट प्रवक्ताओं के वेतन में केवल 11,750 रुपये की मामूली वृद्धि की गई है, जिससे इन उच्च शिक्षित शिक्षकों के बीच शासन और प्रशासन के प्रति गहरा असंतोष व्याप्त है।

