दून में ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में मेडिकल स्टोर बंद: मरीजों परेशान, ठप हुआ 15 करोड़ का कारोबार

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देहरादून में ऑनलाइन दवा बिक्री और ई-फार्मेसी के विरोध में उत्तरांचल औषधि व्यवसायी महासंघ के आह्वान पर बुधवार को राजधानी देहरादून सहित आसपास के इलाकों में दवा की थोक और फुटकर दुकानें पूरी तरह बंद रहीं। इस हड़ताल के कारण दून शहर के करीब 2000 और पूरे जिले में लगभग 3500 मेडिकल स्टोर बंद रहे, जिससे अकेले दून शहर में ही करीब 15 करोड़ रुपये का दवा कारोबार प्रभावित हुआ।

इस राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन के चलते अस्पतालों के बाहर सन्नाटा पसरा रहा और दून अस्पताल पहुंचे मरीजों तथा तीमारदारों को जीवन रक्षक दवाओं के लिए दिनभर भटकना पड़ा, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। एमकेपी रोड पर जैन मेडिकोज के सामने एकत्रित होकर दवा कारोबारियों ने जोरदार प्रदर्शन किया और चेतावनी दी कि यदि ऑनलाइन दवा बिक्री पर तुरंत रोक नहीं लगाई गई, तो राज्य के हजारों दवा कारोबारी और उनके कर्मचारी सड़क पर उतरने को मजबूर होंगे क्योंकि भारी डिस्काउंट देने वाले बड़े ऑनलाइन पोर्टल स्थानीय खुदरा व्यापार को पूरी तरह चौपट कर रहे हैं।

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नकली और नशीली दवाओं की बढ़ेगी खेप

बंद का पुरजोर समर्थन करते हुए दवा कारोबारियों ने ऑनलाइन दवाओं की बिक्री पर गंभीर सुरक्षात्मक सवाल उठाए हैं। सीएंडएफ एसोसिएशन के अध्यक्ष नीरज जैन, महासंघ महासचिव आकाश प्रभाकर और दुकानदार गौरव भार्गव ने चिंता व्यक्त की है कि ऑनलाइन दवाओं की बिक्री में जांच और ट्रैकिंग की कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं है, जिससे बाजार में नकली, घटिया और नशीली दवाओं की आपूर्ति तेजी से बढ़ने का बहुत बड़ा खतरा पैदा हो जाएगा।

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केमिस्ट एसोसिएशन देहरादून के संरक्षक नवीन खुराना और महानगर अध्यक्ष अरविंद तायल का मानना है कि इस अनियंत्रित ऑनलाइन व्यवस्था से मरीजों की सुरक्षा दांव पर लग रही है, साथ ही परंपरागत खुदरा कारोबारियों को रोजाना लाखों रुपये का भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है, जिसके खिलाफ महासंघ का यह संघर्ष आगे भी जारी रहेगा।

मसूरी और विकासनगर में भी दिखा व्यापक असर

इस हड़ताल का असर केवल राजधानी तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि विकासनगर, हरबर्टपुर, सहसपुर और पर्यटन नगरी मसूरी सहित आसपास के तमाम ग्रामीण इलाकों में भी इसका व्यापक असर देखने को मिला। मसूरी उप जिला चिकित्सालय और सिविल अस्पताल पहुंचे ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा क्योंकि निजी मेडिकल स्टोर के साथ-साथ जन औषधि केंद्र भी बंद थे, जिससे लोग पर्चे हाथ में लेकर दर-दर भटकते नजर आए।

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विकासनगर में भी निजी स्टोर बंद होने और जन औषधि केंद्रों पर ताले लटके होने के कारण गरीब मरीजों की मुश्किलें दोगुनी हो गईं, जिसके चलते स्थानीय लोगों ने आपातकाल के दौरान सरकार से दवाओं की वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।

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