नैनीताल- सरोवर नगरी में जो सड़क साल 2018 में भूस्खलन की जद में आकर तबाह हुई वो सड़क 8 साल बाद भी दुरुस्त नहीं हुई है। सिस्टम जनता के सब्र का इम्तिहान लेता रहा । दरख्वास्त पर दरख्वास्त दी जाती रही लेकिन जनता के प्रति जवाबदेह सिस्टम सड़क को दुरुस्त करने में कोताही बरतता रहा।
नतीजा ये हुआ कि नैनीताल के कृष्णापुर वार्ड की जनता का सब्र का पैमाना छलक उठा। जनता ने घर की दहलीज लांघ दी और सड़क पर सिस्टम को बेशर्म करार दे दिया। पहले अर्जियों का दौर शुरू हुआ उसके बाद अब सड़क की सहूलियत से महरूम कृष्णापुर वार्ड के लोगों ने अनशन किया।
अनशन शुरू हुए दूसरा हफ्ता खत्म होने को है लेकिन लापरवाह सिस्टम बुत बना हुआ है.। कोई आश्वासन तक नहीं दिया जा रहा है। लिहाजा अनशन पर डटे लोगों के साथ अब पूरा वार्ड सड़क पर उतरा आया है..बीते रोज कृष्णापुर के लोगों ने सड़क की मांग करते हुए कैंडल मार्च निकाला और प्रशासन के जमीर को जगाने की कोशिश की।
हालांकि सरोवर नगरी के कृष्णापुर वार्ड में सड़क की मांग को लेकर स्थानीय लोगों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। स्थानीय निवासी दुर्गापाल कहती हैं साल 2018 में भूस्खलन के चलते कृष्णापुर क्षेत्र को जोड़ने वाली सड़क क्षतिग्रस्त हो गई थी। इसके बाद से ही क्षेत्रवासी लगातार सड़क मार्ग को दोबारा सुचारू करने की मांग कर रहे हैं।
लेकिन प्रशासन के कान में जूं तक नहीं रेंग रही है। सड़क सुविधा बहाल नहीं होने से क्षेत्र के लोगों को आवागमन में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसी समस्या के समाधान की मांग को लेकर क्षेत्रवासी पिछले करीब दस दिनों से अनशन पर बैठे हैं। इसके बावजूद समस्या जस की तस है।
सड़क की किल्लत झेल रहे लोग प्रशासन से खफा हैं। हालांकि वे जल्द सड़क निर्माण शुरू कराने की गुहार भी लगा रहे हैं। वहीं चेतावनी भी दे रहे हैं कि जब तक उनकी समस्या का समाधान नहीं होता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। गजब है आठ साल गुजर गए लेकिन टूटी सड़क नहीं बनी।
सवाल ये है कि आपदा राहत के बजट में कृष्णापुर वार्ड की सड़क का एस्टीमेट बनाया भी था या यहां की जनता को उनकी तकदीर और जिस्म के सहारे छोड़ दिया। ये बड़ा सवाल है। क्योंकि अगर सिस्टम ने सड़क की सेहत दुरुस्त करने का प्लान सराकर के पास भेजा था तो वो बजट कहां खर्च हुआ और अगर नहीं भेजा तो सिस्टम जनता के प्रति इतना लापरवाह क्यों है ?

