उत्तराखंड वोटर लिस्ट 2027: 12 नवंबर से शुरू होगा विशेष अभियान, 4 जनवरी को आएगी फाइनल लिस्ट

ख़बर शेयर करें

देहरादून। उत्तराखंड में नए साल से पहले मतदाता सूचियों को पूरी तरह पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने की कसरत तेज हो गई है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम ने बुधवार को राज्य के सभी जिलाधिकारियों और जिला निर्वाचन अधिकारियों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए समीक्षा बैठक की। इस दौरान आगामी विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण अभियान 2027 और ईवीएम-वीवीपीएटी की प्रथम स्तरीय जांच की तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया।

बैठक में मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि राज्य के सभी 12,543 मतदान केंद्रों का अधिकारी धरातल पर जाकर निरीक्षण करें। जिन पोलिंग बूथों की इमारतें जर्जर या असुरक्षित हैं, उन्हें तुरंत पास के सरकारी भवनों में शिफ्ट करने की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाए। इसके साथ ही हर केंद्र पर बिजली, पेयजल, रैम्प और शौचालय जैसी जरूरी सुविधाएं दुरुस्त करने को कहा गया है।

यह भी पढ़ें -  "छात्रसंघ से मेयर तक का सफर, अब विधायकी पर नजर".. 4 बार की दावेदारी दिखाएगी असर

प्रदेश में 12 नवंबर 2026 से विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण 2027 की शुरुआत होने जा रही है। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि 01 जनवरी 2027 को अर्हता तिथि मानकर ही मतदाता सूची को अपडेट किया जाएगा। अभियान के दौरान अधिकारी घर-घर और बूथ स्तर पर डेटा की जांच करेंगे ताकि कोई भी पात्र नागरिक वोट देने के अधिकार से वंचित न रहे।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को अगले 10 दिनों तक विशेष सत्यापन अभियान चलाने का आदेश दिया है। इस दौरान मतदाता सूची में दर्ज नाम, उम्र, पता और परिजनों की जानकारी का दोबारा मिलान किया जाएगा। यदि किसी मतदाता के विवरण में कोई गलती पाई जाती है तो तत्काल ‘फॉर्म 8’ भरवाकर उसमें सुधार किया जाएगा।

यह भी पढ़ें -  उत्तराखंड में रोडवेज कर्मचारियों को बड़ी राहत, आज से मिलना शुरू होगा एक महीने का वेतन

आयोग की जारी समयसारणी के अनुसार 12 नवंबर 2026 को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट का प्रकाशन किया जाएगा। इसके बाद 12 नवंबर से 11 दिसंबर 2026 तक आम नागरिक और राजनीतिक दल अपने दावे या आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे। दर्ज कराई गई आपत्तियों पर 28 दिसंबर 2026 तक सुनवाई कर निस्तारण किया जाएगा, जिसके बाद 04 जनवरी 2027 को अंतिम मतदाता सूची जारी होगी।

यह भी पढ़ें -  CM धामी ने साधा सपा और विपक्ष पर निशाना, बोले- "सत्ता से बाहर रहकर खो चुके मानसिक संतुलन"

बैठक में फर्जी या अनुचित आपत्तियों को रोकने के लिए सख्त नियम भी तय किए गए। राजनैतिक दलों को बताया गया कि आपत्तियों की पूरी प्रक्रिया के दौरान कोई भी आक्षेपकर्ता अधिकतम 10 ‘फॉर्म-7’ आवेदन दाखिल कर सकता है। वहीं, सतत अद्यतन की अवधि में एक व्यक्ति प्रति माह अधिकतम 5 फॉर्म-7 ही दे सकेगा। इस उच्चस्तरीय बैठक में संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी प्रकाश चन्द्र दुम्का और सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी मस्तू दास समेत सभी जिलों के डीएम और निर्वाचन अधिकारी मौजूद रहे।