गैरसैंण। उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण स्थित विधानसभा में सत्र के पहले दिन धामी सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 7,844.18 करोड़ रुपये का प्रथम अनुपूरक बजट पेश किया है। राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत इस बजट का सीधा असर प्रदेश के अवस्थापना विकास, स्थानीय निकायों, किसानों, स्वास्थ्य सेवाओं और ग्रामीण-शहरी जनता पर पड़ेगा। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले लाए गए इस अनुपूरक बजट में सरकार ने बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण और जनकल्याणकारी सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है।
कुल बजट का आकार बढ़कर 1.19 लाख करोड़ पार
इस अनुपूरक बजट को पटल पर रखे जाने के बाद चालू वित्तीय वर्ष के लिए उत्तराखंड के कुल बजट का आकार बढ़कर 1,19,547.39 करोड़ रुपये हो गया है। इससे पहले मार्च माह में गैरसैंण में आयोजित बजट सत्र के दौरान विधानसभा द्वारा 1,11,703.21 करोड़ रुपये के मूल वार्षिक बजट को स्वीकृति प्रदान की गई थी। नए अनुपूरक बजट में अवस्थापना विकास के संकल्प को गति देने के लिए पूंजीगत मद में 4,164.32 करोड़ रुपये रखे गए हैं, जबकि जारी विकास कार्यों की गति बढ़ाने के लिए राजस्व मद में 3,679.86 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

त्रिस्तरीय निकायों और अन्नदाताओं के लिए धनवर्षा
धामी सरकार ने छठे राज्य वित्त आयोग की संस्तुतियों के प्रतिवेदन को स्वीकार करते हुए त्रिस्तरीय पंचायतों और शहरी निकायों को बड़ी वित्तीय राहत दी है। राज्य के कर राजस्व में इन निकायों की हिस्सेदारी को 10.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 12.5 प्रतिशत कर दिया गया है, जिससे चालू वित्तीय वर्ष में ही समस्त निकायों को 721 करोड़ रुपये का अतिरिक्त अनुदान प्राप्त होगा। इसके अलावा, अन्नपूर्ति योजना के तहत अन्नदाताओं से धान और गेहूं की खरीद सुनिश्चित करने के लिए 1,100 करोड़ रुपये का विशाल आवंटन किया गया है।

बजट में अवसंरचना और बुनियादी ढांचागत विकास को शीर्ष प्राथमिकता पर रखा गया है। केंद्र सरकार की विशेष सहायता अनुदान योजना के तहत अवसंरचना विकास कार्यों के लिए 500 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। जल जीवन मिशन से जुड़े ठेकेदारों के बकाया भुगतान के लिए 300 करोड़ रुपये और गैरसैंण जलापूर्ति बांध परियोजना के लिए 122 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही, लोक निर्माण विभाग को पीएमजीएसवाई की ग्रामीण सड़कों के रखरखाव के लिए 31 करोड़ रुपये और ग्राम्य विकास विभाग को 30 करोड़ रुपये दिए गए हैं।
इंफ्रास्ट्रक्चर, जल जीवन मिशन और कुंभ मेले को बजट
धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन विकास की दृष्टि से हरिद्वार में आयोजित होने वाले दिव्य कुंभ मेले की व्यवस्थाओं व अवस्थापना कार्यों के लिए 290 करोड़ रुपये तथा हरिद्वार-गंगा कॉरिडोर परियोजना के लिए 30 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। जोशीमठ एवं अन्य संवेदनशील स्थानों पर भू-धंसाव से निपटने और सुरक्षात्मक कार्यों के लिए 48 करोड़ रुपये रखे गए हैं। सांस्कृतिक व धार्मिक आयोजनों के क्रम में नंदा राजजात के सफल संचालन हेतु 20 करोड़ रुपये तथा ज्योतिष, आयुर्वेद व अध्यात्म विधाओं को बढ़ावा देने के लिए मदन मोहन प्राच्य संस्थान को 2 करोड़ रुपये दिए गए हैं।

स्वास्थ्य, शिक्षा और साइबर सुरक्षा पर विशेष ध्यान
स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में आम जनता को राहत देने के लिए अटल आयुष्मान योजना के तहत 100 करोड़ रुपये दिए गए हैं, जबकि सरकारी कर्मचारियों को कैशलेस इलाज की सुविधा प्रदान करने वाली गोल्डन कार्ड योजना के लिए 125 करोड़ रुपये की व्यवस्था हुई है। पिथौरागढ़ व रुद्रपुर मेडिकल कॉलेजों और नर्सिंग कॉलेजों के निर्माण व संचालन के लिए 160 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करते हुए विभिन्न कल्याणकारी पेंशन मदों में 93 करोड़ रुपये, किसान पेंशन योजना में 9 करोड़ रुपये और मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना के लिए 2 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
शिक्षा और खेल जगत को प्रोत्साहन देने के लिए डिजिटल लर्निंग के तहत विद्यालयी एवं उच्च शिक्षा विभाग को 200 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। प्रदेश में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से खेल विश्वविद्यालय के लिए 35 करोड़ रुपये और चंपावत में महिला स्पोर्ट्स कॉलेज निर्माण के लिए 10 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। साइबर सुरक्षा को अभेद्य बनाने और सरकारी विभागों को साइबर हमलों से सुरक्षित रखने के लिए नए ‘स्टेट डेटा सेंटर’ के निर्माण पर 40 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
उद्योग और आजीविका के अवसरों को बढ़ाने के लिए मेगा इंडस्ट्रियल नीति के अंतर्गत अनुदान योजना को 12 करोड़ रुपये दिए गए हैं। मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के मकसद से ट्रॉट प्रोत्साहन योजना के लिए 28 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। कुल मिलाकर, धामी सरकार द्वारा प्रस्तुत यह अनुपूरक बजट राज्य के सर्वांगीण विकास, ग्रामीण और शहरी बुनियादी ढांचे को मजबूती देने तथा आगामी योजनाओं को गति प्रदान करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

