देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने स्टेट हेल्थ कार्ड योजना में बजट की कमी को दूर करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। शासन ने राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण को 75 करोड़ रुपये कर्ज के रूप में जारी कर दिए हैं। स्वास्थ्य सचिव विनय शंकर पांडेय की ओर से इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी किए गए हैं, जिससे राज्य के हजारों कर्मचारियों को राहत मिलेगी।
गोल्डन कार्ड योजना में बजट की किल्लत के कारण काफी समय से हजारों कर्मचारियों के चिकित्सा बिल अटके हुए थे। इसके अलावा स्वास्थ्य प्राधिकरण पर अस्पतालों का बकाया होने के कारण निजी अस्पताल मरीजों को योजना के तहत भर्ती करने से कतरा रहे थे। इससे कर्मचारियों और उनके परिजनों को इलाज कराने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था।
कर्मचारी संगठन लंबे समय से इस समस्या के समाधान की मांग कर रहे थे। इसी स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने योजना के सुचारू संचालन के लिए लोन के रूप में 75 करोड़ रुपये आवंटित करने का निर्णय लिया था। अब शासन स्तर से इस धनराशि को विधिवत जारी कर दिया गया है।
बजट जारी होने पर उत्तराखंड कार्मिक एकता मंच ने खुशी जताई है। एकता मंच के संस्थापक अध्यक्ष रमेश चन्द्र पाण्डे ने कहा कि अस्पतालों के बकाया भुगतान को लेकर सरकार को 15 दिन के भीतर कार्रवाई न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी गई थी। अब धनराशि जारी होने पर उन्होंने सरकार का आभार व्यक्त किया है।
दूसरी ओर, सचिवालय संघ ने मुख्य सचिव आनंद वर्धन से मुलाकात कर गोल्डन कार्ड की विसंगतियों को जल्द दूर करने की मांग की। संघ अध्यक्ष दीपक जोशी ने कहा कि योजना की कमियों से कर्मचारी परेशान हैं और अस्पतालों में समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है।
सचिवालय संघ ने मुख्य सचिव के सामने पुरानी पेंशन बहाली और आठवें वेतनमान से पहले पुरानी एसीपी व्यवस्था लागू करने की मांग भी रखी। मुख्य सचिव ने कर्मचारियों की समस्याओं पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए मांगों के जल्द निस्तारण का आश्वासन दिया है।
75 करोड़ रुपये की यह धनराशि जारी होने से अब सूचीबद्ध अस्पतालों के बकाए का समय पर भुगतान हो सकेगा। इससे अस्पतालों द्वारा कर्मचारियों को इलाज देने से मना करने की शिकायतें दूर होंगी और गोल्डन कार्ड धारकों को कैशलेस स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ सुचारू रूप से मिल सकेगा।

