उत्तराखंड रोडवेज का बड़ा प्लान: पर्वतीय रूटों पर ई-बसों का ट्रायल, घट सकता है बसों का किराया!

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देहरादून। उत्तराखंड परिवहन निगम अपने बेड़े को हाईटेक और ग्रीन बनाने की तैयारी में है। निगम को बजट में इनोवेशन मद से 20 करोड़ रुपये की धनराशि मिली है। इस बजट से नई इलेक्ट्रिक बसें खरीदी जाएंगी, जिन्हें सबसे पहले देहरादून जिले के पर्वतीय रास्तों पर ट्रायल के तौर पर चलाया जाएगा। इसके साथ ही केंद्र सरकार की ‘पीएम-ई बस सेवा योजना’ के तहत मिलने वाली बसों का संचालन भी इसी साल अक्टूबर से शुरू होने की उम्मीद है।

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परिवहन निगम के महाप्रबंधक क्रांति सिंह के मुताबिक, निगम की योजना कुल 20 इलेक्ट्रिक बसों को सड़कों पर उतारने की है। मिले बजट से 12 से 14 नई बसें सीधे खरीदी जाएंगी, जबकि बाकी बसें अनुबंध पर ली जाएंगी। इन बसों की खरीद प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

दूसरी ओर, ‘पीएम-ई बस सेवा’ के तहत देहरादून और हरिद्वार जिलों के लिए 137 इलेक्ट्रिक बसें प्रस्तावित हैं। इसके लिए दोनों शहरों में चार्जिंग स्टेशन और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है।

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निगम सबसे पहले चकराता और मसूरी जैसे कठिन पहाड़ी रास्तों पर इन बसों का ट्रायल करेगा। इस ट्रायल में देखा जाएगा कि चढ़ाई और घुमावदार रास्तों पर बैटरी की खपत कितनी होती है और एक बार फुल चार्ज होने पर बस कितनी दूरी तय कर पाती है।

यात्रियों को बेहतर सुविधा देने के लिए रोडवेज निजी ऑपरेटरों की तर्ज पर स्लीपर बसें चलाने की भी योजना बना रहा है। शुरुआत में हल्द्वानी-देहरादून रूट पर इलेक्ट्रिक और स्लीपर बसें चलाने पर मंथन चल रहा है। फिलहाल निगम को वोल्वो बसों के संचालन पर करीब 60 रुपये प्रति किलोमीटर का खर्च आता है। अगर इलेक्ट्रिक बसों का परिचालन खर्च इससे कम रहता है, तो रोडवेज इसका सीधा फायदा यात्रियों को किराया घटाकर देगा।