देहरादून। उत्तराखंड में बढ़ते सड़क हादसों पर नकेल कसने और घायलों को तुरंत इलाज दिलाने के लिए जिलों में सड़क सुरक्षा समन्वयक तैनात किए जाएंगे। देहरादून स्थित परिवहन मुख्यालय ने इस संबंध में विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेज दिया है। अपर परिवहन आयुक्त सनत कुमार सिंह के अनुसार, यह कदम सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा समिति के निर्देशों के तहत उठाया जा रहा है।
परिवहन विभाग ने सड़क सुरक्षा कोष को मजबूत करने के लिए चालान राशि की हिस्सेदारी बढ़ाने का भी फैसला लिया है। वर्तमान में पुलिस और परिवहन विभाग द्वारा काटे गए चालान की 30 प्रतिशत राशि इस फंड में जमा होती है, जिसे बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने का प्रस्ताव भेजा गया है। फंड में बजट बढ़ने से दुर्घटना संभावित क्षेत्रों को सुधारने और सुरक्षा उपकरण खरीदने में तेजी आएगी।
राज्य में सड़क हादसों में गंभीर रूप से घायलों को समय पर इलाज देने के लिए फरवरी में ‘पीएम राहत योजना’ शुरू की गई थी। हालांकि, सही तालमेल न होने के कारण अब तक केवल सात लोग ही इसका लाभ उठा पाए हैं। जिलों में समन्वयकों की तैनाती से योजना की इस मुख्य अड़चन को दूर करने में बड़ी मदद मिलेगी।
जिलों में तैनात होने वाले रोड सेफ्टी कोऑर्डिनेटर दुर्घटना पीड़ितों को ‘पीएम राहत योजना’ के तहत तुरंत अस्पताल और इलाज की सुविधा दिलाना सुनिश्चित करेंगे। इसके साथ ही, वे धरातल पर सड़क सुरक्षा मानकों और हादसों को रोकने वाली योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर सीधी नजर रखेंगे।
इसके अलावा, ये समन्वयक ‘हिट एंड रन’ मामलों में प्रभावितों व उनके परिजनों को मिलने वाली मुआवजा राशि समय पर दिलाने की जिम्मेदारी भी संभालेंगे। वे पुलिस, स्वास्थ्य और परिवहन विभाग के बीच समन्वय स्थापित कर कागजी प्रक्रियाओं में होने वाली देरी को खत्म करेंगे।
विजेंद्र श्रीवास्तव की रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट की समिति के निर्देशों पर तैयार इस प्रस्ताव को शासन से जल्द मंजूरी मिलने की उम्मीद है। मंजूरी मिलते ही जिलों में समन्वयकों की नियुक्ति और बजट आवंटन की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

