देहरादून। उत्तराखंड की धामी सरकार ने प्रांतीय रक्षक दल स्वयंसेवकों को एक बहुत बड़ी सौगात दी है। शासन द्वारा देहरादून में पीआरडी जवानों के लिए एक नई मानक संचालन प्रक्रिया जारी की गई है। इसके तहत अब ड्यूटी या ट्रेनिंग के दौरान बीमार या घायल होकर अस्पताल में भर्ती होने वाले जवानों का मानदेय नहीं कटेगा, बल्कि उन्हें उपचार की पूरी अवधि का मानदेय दिया जाएगा।
युवा कल्याण मंत्री रेखा आर्या के प्रयासों से लागू हुए इस फैसले का सीधा लाभ प्रदेश के करीब 10 हजार पीआरडी जवानों को मिलेगा। कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने बताया कि यह नई व्यवस्था मुख्यमंत्री की पूर्व में की गई घोषणा के अनुरूप लागू की गई है। उन्होंने कहा कि पीआरडी स्वयंसेवक हमेशा कठिन और विपरीत परिस्थितियों में भी अपनी सेवाएं पूरी निष्ठा के साथ दे रहे हैं। ऐसे में संकट के समय उनके हितों और सामाजिक सुरक्षा का ध्यान रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
पुरानी व्यवस्था में कट जाता था मानदेय
विभागीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि पुरानी व्यवस्था के तहत यदि कोई जवान ड्यूटी के दौरान किसी हादसे का शिकार हो जाता था या गंभीर बीमार होकर अस्पताल में भर्ती होता था, तो उसकी अनुपस्थिति का मानदेय पूरी तरह काट लिया जाता था। इससे जवानों के सामने इलाज के वक्त आर्थिक संकट खड़ा हो जाता था, लेकिन अब सरकार ने इस विसंगति को पूरी तरह दूर कर दिया है।
नई SOP के मुख्य बिंदु और शर्तें
अस्पताल में भर्ती रहने की पूरी अवधि को अब प्रशासनिक रूप से ‘ऑन ड्यूटी’ माना जाएगा। इलाज और अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान जवानों को अधिकतम 180 दिन का पूरा मानदेय दिया जाएगा। यह व्यवस्था पूरे प्रदेश में एक समान और पारदर्शी तरीके से तत्काल प्रभाव से लागू होगी।
मंत्री रेखा आर्या ने न्यूज़ रूम को बताया कि राज्य सरकार पीआरडी स्वयंसेवकों के कल्याण के लिए लगातार ठोस निर्णय ले रही है। यह नई व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी होगी और इसके लिए एक तय प्रक्रिया बनाई गई है, जिसके तहत ही पात्र स्वयंसेवकों को सीधे लाभ ट्रांसफर किया जाएगा।
सरकार का यह दूरगामी कदम जमीनी स्तर पर मुस्तैद रहने वाले पीआरडी जवानों के मनोबल को बढ़ाने में एक बड़ा मददगार साबित होगा, जिससे उन्हें ड्यूटी के दौरान किसी भी अनहोनी की स्थिति में एक मजबूत आर्थिक सुरक्षा कवच मिल सकेगा।

