देहरादून। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे भीषण युद्ध का एक सीधा और अप्रत्याशित असर उत्तराखंड परिवहन निगम की 59 बसों की खरीद प्रक्रिया पर पड़ा है। वाहन निर्माता कंपनी टाटा ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे माल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी का हवाला देते हुए पुरानी तय दरों पर बसें देने से साफ इनकार कर दिया है।
उत्तराखंड परिवहन निगम की महाप्रबंधक संचालन क्रांति सिंह के मुताबिक, कंपनी द्वारा अचानक कीमतें बढ़ाए जाने से 59 बसों की यह महत्वपूर्ण डील बीच में ही अटक गई है। इस विवाद के कारण राज्य के पर्वतीय मार्गों पर नई बसों के संचालन की योजना पूरी तरह प्रभावित हो रही है।
परिवहन निगम और निर्माता कंपनी टाटा के उच्च अधिकारियों के बीच इस अचानक उपजे गतिरोध को सुलझाने के लिए बातचीत के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। जानकारी के अनुसार, उत्तराखंड परिवहन निगम ने पिछले वर्ष जुलाई महीने में टाटा मोटर्स के साथ कुल 100 नई बसें खरीदने के लिए एक व्यावसायिक समझौता किया था।
निगम की ओर से इस खरीद के लिए बकायदा परचेज ऑर्डर (PO) भी जारी कर दिया गया था, जिसमें प्रति बस की दर 35 लाख 35 हजार रुपये तय की गई थी। इसके बाद सितंबर महीने में केंद्र सरकार ने बसों पर लागू होने वाली जीएसटी (GST) की दर को 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया था।
टैक्स में इस 10 प्रतिशत की कटौती होने से प्रति बस की कीमत में करीब 2 लाख 77 हजार रुपये की बड़ी कमी आ गई थी। इस बजटीय राहत के बाद टाटा कंपनी ने कुल 35 करोड़ 35 लाख रुपये के उसी स्वीकृत बजट में निगम को नौ अतिरिक्त बसें देने का एक नया प्रस्ताव दिया था।
जीएसटी घटने के कारण निर्माता कंपनी के पास इन नौ अतिरिक्त बसों का पैसा शेष बच रहा था, जिसे एडजस्ट किया जाना था। इसके अलावा हाल ही में राज्य कैबिनेट की बैठक में उत्तराखंड के पर्वतीय मार्गों पर बसों की किल्लत दूर करने के लिए 50 और नई बसें खरीदने का एक अलग प्रस्ताव पास किया गया था।
कैबिनेट से हरी धन-स्वीकृति मिलने के बाद इन 50 अतिरिक्त बसों को 32 लाख 58 हजार रुपये प्रति बस की दर से खरीदा जाना तय हुआ था। लेकिन इसी बीच खाड़ी देशों में अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध छिड़ गया, जिसने अंतरराष्ट्रीय व्यापार और कच्चे माल की आपूर्ति को बुरी तरह प्रभावित कर दिया।
टाटा कंपनी ने इसी वैश्विक संकट और खाड़ी देशों के युद्ध के कारण ऑटोमोबाइल सेक्टर में कच्चे माल की लागत बढ़ने की बात कही है। कंपनी ने पुरानी दरों को अमान्य घोषित करते हुए अब बस की नई कीमत को बढ़ाकर सीधे 36 लाख रुपये प्रति बस कर दिया है।
वाहन निर्माता कंपनी द्वारा अचानक की गई इस मूल्य वृद्धि के कारण निगम का पूरा बजटीय गणित बिगड़ गया है। यही वजह है कि कुल 59 बसों की खरीद की यह महत्वपूर्ण डील वर्तमान में अधर में लटक गई है।
परिवहन निगम के अधिकारियों के मुताबिक, इन सभी 59 बसों को राज्य की परिवहन व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए किसी भी स्थिति में आगामी अक्तूबर महीने तक खरीदा जाना अनिवार्य है। समय सीमा के दबाव को देखते हुए निगम ने निर्माता कंपनी को जल्द से जल्द अपना अंतिम लिखित जवाब सौंपने को कहा है।
उत्तराखंड परिवहन निगम की महाप्रबंधक संचालन क्रांति सिंह ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा कि खाड़ी देशों के युद्ध का हवाला देकर टाटा ने पुरानी दरों पर गाड़ियां देने से मना किया है। हालांकि निगम स्तर पर वार्ता के जरिए इस विवाद को सुलझाने के पूरे प्रयास किए जा रहे हैं।
महाप्रबंधक ने स्पष्ट किया कि चूंकि अक्तूबर महीने तक बसों की खरीद प्रक्रिया को हर हाल में पूरा किया जाना है, इसलिए निगम ज्यादा इंतजार नहीं करेगा। अगर टाटा कंपनी के साथ दरों को लेकर समय रहते कोई लिखित सहमति नहीं बनी, तो परिवहन निगम उत्तराखंड की जनता के हित में दूसरे विकल्पों पर विचार कर सकता है।

