Badrinath Temple: BKTC अध्यक्ष ने स्वीकारी गोदियाल की चुनौती, गोदियाल पर लगाया ₹12 लाख की लूट का आरोप

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देहरादून। उत्तराखंड के विश्वप्रसिद्ध बदरीनाथ मंदिर में चढ़ावा हेराफेरी मामले को लेकर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक संग्राम बेहद आक्रामक मोड़ पर पहुंच गया है। बदरी-केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने आज एक प्रेस वार्ता कर कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल पर उनके कार्यकाल के दौरान मंदिर को दोनों हाथों से लूटने के बेहद संगीन आरोप लगाए हैं।

इसके साथ ही, बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने गणेश गोदियाल द्वारा बीते मंगलवार को दी गई खुली डिबेट की चुनौती को सहर्ष स्वीकार कर लिया है। द्विवेदी ने गोदियाल को सीधे ललकारते हुए कहा कि वे बदरीनाथ या केदारनाथ धाम के पावन प्रांगण में आकर खुली बहस करें, जिसके लिए स्थान पहले से ही पूरी तरह तय है।

इस पूरे विवाद की शुरुआत बदरीनाथ धाम में चढ़ावे की राशि में हुई कथित हेराफेरी के बाद हुई थी, जिस पर कांग्रेस लगातार हमलावर है। कांग्रेस नेता गणेश गोदियाल ने इस मुद्दे पर बीकेटीसी के वर्तमान अध्यक्ष को सार्वजनिक मंच पर आकर सीधी बहस करने की खुली चुनौती दी थी।

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प्रेस कॉन्फ्रेंस में तीखा पलटवार करते हुए हेमंत द्विवेदी ने कहा कि मंदिर समिति ने चढ़ावा चोरी की शिकायत मिलने पर बिना किसी देरी के तत्काल कड़ी कार्रवाई की है। इस मामले में आरोपी के खिलाफ तुरंत मुकदमा दर्ज कराया गया और वर्तमान में आरोपी जेल की सलाखों के पीछे बंद है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि मामले की गहन प्रशासनिक और कानूनी जांच अभी भी पूरी तेजी के साथ जारी है। जांच रिपोर्ट के सामने आते ही इस पूरे प्रकरण में शामिल सभी लोगों के खिलाफ कठोरतम वैधानिक कार्रवाई की जाएगी, लेकिन कांग्रेस इस घटना का जबरन राजनीतिकरण कर रही है।

इसके बाद बीकेटीसी अध्यक्ष ने पूर्व अध्यक्ष गणेश गोदियाल के 5 साल और 4 महीने के लंबे कार्यकाल पर कई गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि गोदियाल के कार्यकाल के दौरान बदरी-केदार मंदिर समिति को दोनों हाथों से बेरहमी से लूटा गया था।

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द्विवेदी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उस समय मंदिर के चढ़ावे और दान के पवित्र पैसे को व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए पानी की तरह बहाया गया था। उन्होंने दावा किया कि गोदियाल के समय में एक वृत्तचित्र (डॉक्यूमेंट्री) के निर्माण के लिए नियम विरुद्ध ₹12 लाख की भारी-भरकम राशि जारी की गई थी।

इतना ही नहीं, मंदिर के पवित्र कोष का दुरुपयोग करते हुए एक व्यक्तिगत और निजी स्वामित्व वाली सड़क के निर्माण के लिए भी भारी धन आवंटित किया गया था। इस निर्माण कार्य का मंदिर की व्यवस्थाओं या श्रद्धालुओं की सुविधाओं से कोई लेना-देना नहीं था।

द्विवेदी ने तत्कालीन बोर्ड की कार्यप्रणाली पर बड़ा हमला बोलते हुए कहा कि गोदियाल के कार्यकाल में कोरम पूरा न होने पर भी बंद कमरों में बोर्ड बैठकें आयोजित की गईं। इन बंद कमरों की बैठकों में नियमों को ताक पर रखकर मनमाने ढंग से कई वित्तीय प्रस्तावों को आनन-फानन में पास कराया गया था।

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खुली डिबेट की चुनौती पर बात करते हुए हेमंत द्विवेदी ने कहा कि वे भगवान के दरबार में सच और झूठ का फैसला करने के लिए हर समय तैयार हैं। यह बहस किसी सड़क, टीवी स्टूडियो या राजनीतिक मंच पर नहीं, बल्कि केवल बदरीनाथ या केदारनाथ मंदिर के पवित्र प्रांगण में ही होगी।

उन्होंने साफ किया कि बहस के लिए स्थान तो पहले से ही तय है, अब कांग्रेस नेता गणेश गोदियाल को केवल अपनी सुविधा के अनुसार समय और तारीख की घोषणा करनी है। इस तीखे पलटवार के बाद अब देखना होगा कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गणेश गोदियाल मंदिर समिति के इस नए और आक्रामक स्टैंड पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।

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