देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से पर्यावरण प्रेमियों के लिए एक बेहद राहत भरी खबर सामने आ रही है। सहस्त्रधारा रोड चौड़ीकरण की जद में आए करीब 900 से अधिक बड़े पेड़ों को ट्रांसप्लांट करने के चार साल बाद अब उनमें नई कौंपले फूट पड़ी हैं। अदालत के आदेश पर इन विशालकाय पेड़ों को रायपुर-थानों रोड पर क्रिकेट स्टेडियम के पास शिफ्ट किया गया था, जहां लंबे इंतजार के बाद अब मानसून के सीजन में हरियाली की नई उम्मीद जागी है।
रायपुर क्षेत्र में ट्रांसप्लांट किए गए इन पेड़ों में अब नई ग्रोथ साफ दिखने लगी है। Dehradun Tree Transplantation प्रोजेक्ट के तहत शिफ्ट किए गए इन 900 से अधिक भारी-भरकम पेड़ों में से वर्तमान में लगभग 20 फीसदी पेड़ों में नई कौंपले फूटने लगी हैं, जिसने पर्यावरणविदों को भी चौंका दिया है।
सहस्त्रधारा रोड को चौड़ा करने के लिए लोक निर्माण विभाग द्वारा बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई की योजना बनाई गई थी। स्थानीय नागरिकों और पर्यावरणविदों ने इस फैसले का पुरजोर विरोध किया। जनभावनाओं और अदालत के कड़े रुख के बाद, साल 2022 में PWD ने पेड़ों को काटने के बजाय उन्हें वैज्ञानिक तरीके से ट्रांसप्लांट करने का फैसला लिया।
विशेषज्ञों की सीधी देखरेख में इन पेड़ों की छंटाई की गई और इन्हें रायपुर-थानों रोड समेत कई चिन्हित जगहों पर शिफ्ट किया गया। इन पेड़ों में मुख्य रूप से पीपल, पिलखन और यूकेलिप्टस जैसी अनेक प्रजातियां शामिल थीं, जिन्हें बचाने के लिए सरकार ने लाखों रुपये खर्च किए थे।
शिफ्टिंग के शुरुआती दौर में अनुकूल परिस्थितियां और उचित देखभाल न मिलने के कारण अधिकतर पेड़ सूखने लगे थे। भारी-भरकम बजट खर्च होने के बाद भी यह पूरा अभियान विफल होता दिख रहा था। पेड़ों की सूखती टहनियों को देखकर स्थानीय लोग इस जगह को ‘पेड़ों का कब्रिस्तान’ कहने लगे थे।
लेकिन अब रायपुर-थानों रोड की सूरत बदल रही है। हाल ही में हुई बरसात के बाद सूखे पेड़ों से फूटती हरी कौंपलों ने नई उम्मीद जगा दी है। पर्यावरणविदों का मानना है कि धीरे-धीरे ही सही, पुनर्जीवन पाने वाले इन पेड़ों का आंकड़ा आने वाले दिनों में और बढ़ेगा।
सिर्फ रायपुर ही नहीं, बल्कि आईटी पार्क और अस्थल के पास लगाए गए ट्रांसप्लांटेड पेड़ों में भी अब नई पत्तियां आने लगी हैं। ईको ग्रुप सोसाइटी के अध्यक्ष आशीष गर्ग ने बताया कि लगभग 20% पेड़ों में ग्रोथ दिखना सुखद है।
हालांकि, आशीष गर्ग ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि पेड़ ट्रांसप्लांटेशन एक जटिल वैज्ञानिक प्रक्रिया है, लेकिन उत्तराखंड में इस काम में काफी जल्दबाजी दिखाई गई थी। उन्होंने साफ किया कि वे इस पूरे अभियान की जमीनी हकीकत और पारदर्शिता जानने के लिए जल्द ही आरटीआई भी दाखिल करेंगे।

