देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। जालसाजों ने सचिवालय और विधानसभा में नौकरी लगवाने का झांसा देकर एक युवक से ₹7.38 लाख हड़प लिए। ठगों ने पीड़ित को झांसा देने के लिए फर्जी दस्तावेज और विधानसभा के बड़े अधिकारियों व मंत्रियों के नाम का इस्तेमाल किया। नेहरू कॉलोनी थाना पुलिस ने इस हाईप्रोफाइल धोखाधड़ी मामले में महिला समेत तीन आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
‘निदेशक का ड्राइवर हूं, मंत्रियों तक है पहुंच’
मंदाकिनी विहार के रहने वाले पीड़ित मुकेश कुमार ने पुलिस को बताया कि कुछ समय पहले उसकी मुलाकात मोहम्मद आरिफ नाम के व्यक्ति से हुई थी। आरिफ ने खुद को विधानसभा में तैनात निदेशक अंकिता सिंह का ड्राइवर बताया। उसने दावा किया कि अधिकारियों और मंत्रियों से उसकी सीधी जान-पहचान है और वह सचिवालय या विधानसभा में उसकी पक्की सरकारी नौकरी लगवा सकता है।
आरोपी आरिफ ने मुकेश को झांसे में लेकर उसके सभी शैक्षणिक दस्तावेज जमा करा लिए। उसने भरोसा दिलाया कि 6 जनवरी को उसकी ज्वाइनिंग हो जाएगी। वहीं शुरुआत में नौकरी के नाम पर ₹6 लाख लिए गए और बाद में कागजी कार्रवाई का बहाना बनाकर कुल ₹7.38 लाख ऐंठ लिए गए।
‘मंत्री जी आएंगे…’ केंटीन में रची गई दूसरी कहानी
जब ज्वाइनिंग की तारीख नजदीक आई, तो आरोपियों ने ठगी को छुपाने के लिए एक नया ड्रामा रचा। आरिफ ने मुकेश की मुलाकात अनुराग नाम के एक अन्य व्यक्ति से कराई। अनुराग ने खुद को विधानसभा का कर्मचारी बताया। उन्होंने मुकेश से कहा, “विधानसभा में एक बड़ा फंक्शन होने वाला है, जिसमें बड़े मंत्री और सचिव शामिल होंगे। उसी फंक्शन के बाद केंटीन के रास्ते तुम्हें सीधे ज्वाइनिंग लेटर दिला दिया जाएगा।”
ऐसे खुली पोल और बंद हुआ मोबाइल
5 जनवरी के बाद जब आरोपी मोहम्मद आरिफ का मोबाइल अचानक स्विच ऑफ हो गया, तब मुकेश को शक हुआ। मुकेश ने जब अपने स्तर से सचिवालय और विधानसभा में पता किया, तो उसे समझ आया कि वह एक बड़े ‘जॉब स्कैम’ (Job Scam) का शिकार हो चुका है। इसके बाद पीड़ित ने तुरंत पुलिस की शरण ली।
बहरहाल, नेहरू कॉलोनी पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी मोहम्मद आरिफ, उसकी पत्नी और अनुराग के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस अब आरोपियों के बैंक खातों और उनके पुराने रिकॉर्ड्स को खंगाल रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उन्होंने और कितने बेरोजगार युवाओं को अपना शिकार बनाया है।

