सुदेशा देवी पर बनी ‘द ट्री वॉट फॉल’ डॉक्यूमेंट्री लंदन इंडियन फिल्म फेस्टिवल में चयनित

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देहरादून। उत्तराखंड की चर्चित डॉक्यूमेंट्री ‘द ट्री वॉट फॉल’ का चयन प्रतिष्ठित लंदन इंडियन फिल्म फेस्टिवल के लिए किया गया है। यह फिल्म 83 वर्षीय पर्यावरण कार्यकर्ता सुदेशा देवी के जीवन, उनके संघर्ष और चिपको आंदोलन में निभाई गई भूमिका पर आधारित है। फिल्म का प्रदर्शन लंदन इंडियन फिल्म फेस्टिवल में होगा, जो लंदन, बर्मिंघम और मैनचेस्टर में 19 जुलाई तक आयोजित किया जा रहा है।

करीब चार वर्षों में तैयार हुई यह डॉक्यूमेंट्री उत्तराखंड के हिमालयी गांवों की उन महिलाओं की कहानी सामने लाती है, जिन्होंने जंगलों और पेड़ों की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित किया। फिल्म विशेष रूप से सुदेशा देवी के संघर्ष और प्रकृति संरक्षण के प्रति उनके समर्पण को केंद्र में रखती है।

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सुदेशा देवी चिपको आंदोलन की उन महिलाओं में शामिल रहीं जिन्होंने लगभग पांच दशक पहले पेड़ों को कटने से बचाने के लिए उन्हें गले लगाकर विरोध दर्ज कराया। इस ऐतिहासिक आंदोलन ने पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में वैश्विक पहचान बनाई और उत्तराखंड को दुनिया के प्रमुख पर्यावरण आंदोलनों में स्थापित किया।

फिल्म के लेखक और निर्देशक दीपक स्मोला हैं। कहानी दीपक स्मोला और अपूर्व बख्शी ने लिखी है, जबकि निर्माण अपूर्व बख्शी, दीपक स्मोला और मनीषा त्यागराजन ने किया है। सिनेमैटोग्राफी ध्रुव वर्मा और सिद्धार्थ गोयल ने की है। संपादन अजीत नागर और ध्रुव वर्मा ने किया है, जबकि संगीत ताजदार जूनेद ने तैयार किया है।

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दीपक स्मोला के अनुसार यह डॉक्यूमेंट्री केवल सुदेशा देवी की व्यक्तिगत यात्रा नहीं, बल्कि उन महिलाओं के संघर्ष की कहानी भी है जिन्होंने पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। फिल्म महिलाओं के नेतृत्व, पर्यावरणीय चुनौतियों और जमीनी संघर्ष को केंद्र में रखती है।

लंदन इंडियन फिल्म फेस्टिवल के लिए इस डॉक्यूमेंट्री का चयन उत्तराखंड की डॉक्यूमेंट्री फिल्मों के लिए उल्लेखनीय उपलब्धि है। इससे चिपको आंदोलन और सुदेशा देवी के संघर्ष को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के सामने प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। साथ ही उत्तराखंड की पर्यावरणीय विरासत और महिलाओं की भूमिका को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित किया जाएगा।

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द ट्री वॉट फॉल‘ के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, महिला नेतृत्व और चिपको आंदोलन के ऐतिहासिक महत्व को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित किया जाएगा। लंदन इंडियन फिल्म फेस्टिवल में चयन के साथ यह डॉक्यूमेंट्री उत्तराखंड की एक महत्वपूर्ण सामाजिक और पर्यावरणीय कहानी को दुनिया के दर्शकों तक पहुंचाने का माध्यम बनेगी।

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