देहरादून। उत्तराखंड की आर्थिकी की रीढ़ माने जाने वाले पर्यटन क्षेत्र को लेकर राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। आज सचिवालय स्थित अपने सभागार में मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने पर्यटन विभाग की एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की।
बैठक में मुख्य सचिव ने विभाग की सभी वर्तमान योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की और अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि आगामी 5 वर्षों के लिए एक स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किया जाए, ताकि धरातल पर काम के ठोस नतीजे दिखाई दे सकें। मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन ने स्पष्ट किया कि उत्तराखंड के पर्यटन उत्पादों की पब्लिसिटी के बिना तय लक्ष्यों को हासिल करना मुमकिन नहीं होगा।
उन्होंने इसके लिए विभाग को एक मजबूत ‘वार्षिक कार्ययोजना’ बनाने के निर्देश दिए ताकि वैश्विक स्तर पर उत्तराखंड के पर्यटन स्थलों का प्रचार-प्रसार योजनाबद्ध तरीके से हो सके।
राज्य में लागू होगी त्रिस्तरीय पर्यटन रणनीति
उत्तराखंड में पर्यटन इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए मुख्य सचिव ने तीन चरणों में काम करने की रणनीति तैयार करने को कहा है। जिसमें तुरंत पूरे होने वाले इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाओं का विकास, नए डेस्टिनेशन और पर्यटन सर्किट का निर्माण, वैश्विक स्तर के बड़े प्रोजेक्ट्स और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में बड़े निजी निवेशकों को शामिल करना आदि सम्मिलित है।
युवाओं को मिलेगा ग्लोबल गाइड प्रशिक्षण
रोजगार की दिशा में एक बड़ा नीतिगत फैसला लेते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश के युवाओं को गाइड का प्रोफेशनल प्रशिक्षण दिया जाए और इस व्यवस्था को पूरी तरह से संस्थागत किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ट्रेनिंग का मॉड्यूल इस तरह आधुनिक बनाया जाए जिससे उत्तराखंड के युवाओं को न केवल राज्य या देश में, बल्कि विदेशों में भी आसानी से रोजगार मिल सके।
बढ़ेगी ग्लैंपिंग और वाइब्रेंट विलेज की मांग
मुख्य सचिव ने वर्तमान समय में पर्यटकों के बीच तेजी से बढ़ते लक्जरी कैंपिंग यानी ग्लैंपिंग प्रोजेक्ट्स के क्रेज पर भी फोकस किया। उन्होंने पर्यटन विभाग को तुरंत उपयुक्त जगहें चिह्नित कर ग्लैंपिंग साइट्स विकसित करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही सीमांत क्षेत्रों के विकास के लिए ‘वाईब्रेंट विलेज’ योजना के तहत पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रयास करने को कहा।
इस महत्वपूर्ण नीतिगत बैठक के दौरान पर्यटन विभाग के सचिव धीराज गर्ब्याल, अपर सचिव अभिषेक रोहिला सहित कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी और तकनीकी विशेषज्ञ मौजूद रहे, जिन्हें इन सभी निर्देशों पर तुरंत काम शुरू करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

