उत्तराखंड: अतिरिक्त डेडलाइन भी खत्म, न भरे जा सके सड़कों के जख्म..! 1,261 KM लंबी सड़कें अब भी बदहाल

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देहरादून। उत्तराखंड में सड़कों को गड्ढा मुक्त करने के लिए शासन की ओर से निर्धारित अतिरिक्त समय सीमा पूरी हो चुकी है, लेकिन जमीनी हालात अब भी नहीं सुधरे हैं। तय डेडलाइन समाप्त होने के बाद भी प्रदेशभर में 1,261 किलोमीटर लंबी सड़कों पर खतरनाक गड्ढे बरकरार हैं। इस प्रशासनिक ढिलाई का सीधा खामियाजा आम जनता और वाहन चालकों को भुगतना पड़ रहा है।

राज्य में मानसून और बारिश के दौरान कुल 3,665 मार्गों के 9,341 किलोमीटर हिस्से पर बड़े पैमाने पर गड्ढे हो गए थे। गंभीर स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री ने सभी निर्माण एजेंसियों को 15 अक्टूबर तक हर हाल में सड़कें गड्ढा मुक्त करने के निर्देश दिए थे। बाद में बारिश और अन्य वजहों का हवाला देते हुए इस समय सीमा को बढ़ाकर 18 अक्टूबर कर दिया गया था। इस अतिरिक्त डेडलाइन के बाद भी राज्यभर में केवल 8,080 किलोमीटर मार्ग पर ही पैच वर्क का काम पूरा किया जा सका है।

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अभी भी राज्य के विभिन्न हिस्सों में 1,261 किलोमीटर लंबी सड़कें ऐसी हैं जिन पर मरम्मत कार्य नहीं हो पाया है। समय सीमा बीतने के बाद भी इतने बड़े हिस्से में काम अधूरा रहना निर्माण एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। विभिन्न एजेंसियों के कामकाज की समीक्षा में सामने आया है कि सबसे खराब स्थिति पीएमजीएसवाई की रही है। पीएमजीएसवाई को 3,390 किलोमीटर मार्ग के सुधारीकरण का जिम्मा मिला था, लेकिन वह केवल 64 प्रतिशत काम ही पूरा कर सकी है।

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इसके अलावा शहरी विकास विभाग के अंतर्गत भी सड़कों की पेचिंग का करीब 15 प्रतिशत कार्य अभी अधूरा लटका हुआ है। इसके विपरीत, लोक निर्माण विभाग और राष्ट्रीय राजमार्ग ने अपने लक्ष्यों को समय पर पूरा कर लिया है। लोनिवि को 4,939 किलोमीटर मार्ग पर पैच वर्क करना था, जिसके सापेक्ष उन्होंने बेहतर प्रदर्शन करते हुए 4,989 किलोमीटर मार्ग पर पेचिंग पूरी कर दिखाई है। एनएच प्राधिकरण ने भी अपना लक्ष्य शत-प्रतिशत पूरा कर लिया है।

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डेडलाइन समाप्त होने के बाद भी सड़कों की स्थिति पूरी तरह दुरुस्त न होने से यह साफ है कि पर्वतीय और मैदानी इलाकों के यात्रियों को अभी कुछ और दिन बदहाल रास्तों से जूझना होगा। यह देखना अहम होगा कि फिसड्डी साबित हो रही एजेंसियों पर शासन स्तर पर क्या कार्रवाई की जाती है।