देहरादून। उत्तराखंड ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग के प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। आयोग के सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल ने नियमों में बदलाव की पुष्टि करते हुए बताया कि अब उपाध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल तीन वर्ष के लिए निर्धारित किया जाएगा। इस नई व्यवस्था का सीधा असर आयोग के मौजूदा पदाधिकारियों और आगामी मनोनयन प्रक्रिया पर पड़ेगा।
वर्ष 2017 में गठित इस आयोग के उपाध्यक्ष और सदस्यों के पदों पर लंबे समय से कोई फेरबदल नहीं हुआ है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, आगामी 21 अगस्त को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में पलायन निवारण आयोग की एक बेहद महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक होने वाली है।
माना जा रहा है कि 21 अगस्त की बैठक के बाद वर्तमान उपाध्यक्ष और सदस्यों को कार्यमुक्त किया जा सकता है। उनके स्थान पर जल्द ही नई टीम को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इससे पहले, वर्ष 2017 में आयोग के गठन के समय सदस्यों का कार्यकाल 5 वर्ष तय किया गया था, जिसे नवंबर 2020 में एक संशोधन के जरिए हटा दिया गया था।
समय-सीमा की बाध्यता समाप्त होने के बाद से ही आयोग में पुरानी टीम कार्य कर रही थी। वर्तमान में डॉ. एसएस नेगी आयोग के उपाध्यक्ष हैं, जबकि सदस्यों में राम प्रकाश पैन्युली (टिहरी), सुरेश सुयाल (अल्मोड़ा), दिनेश रावत (पौड़ी), अनिल सिंह शाही (अल्मोड़ा) और रंजना रावत (रुद्रप्रयाग) शामिल हैं।
इसके अलावा, पलायन निवारण आयोग के कामकाज को अधिक प्रभावी बनाने के लिए शासन स्तर पर एक नए उपाध्यक्ष का पद भी सृजित किया गया है। नए सृजित पद का कार्यकाल फिलहाल फरवरी 2027 तक तय किया गया है। आयोग के पुनर्गठन से राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में पलायन रोकने के प्रयासों को नई गति मिलने की उम्मीद है।

