उत्तराखंड शिक्षा विभाग में योग शिक्षक के 33 पद होंगे डाउनग्रेड, राष्ट्रीय खेलों के पदक विजेताओं को मिलेगी नौकरी

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देहरादून। देहरादून में 38वें राष्ट्रीय खेलों के स्वर्ण पदक विजेताओं के लिए शिक्षा विभाग में आउट ऑफ टर्न सरकारी नौकरी पाने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। खेल विभाग के प्रस्ताव के अनुसार, खिलाड़ियों को नियुक्ति देने के लिए शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापक के 4600 ग्रेड वेतन वाले पदों को डाउनग्रेड कर 4200 ग्रेड वेतन किया जाएगा।

राष्ट्रीय खेलों की पदक तालिका में उत्तराखंड को 25वें से सीधे सातवें स्थान पर पहुँचाने वाले राज्य के 243 पदक विजेताओं को सरकारी विभागों में नौकरी दी जानी है। इसी कड़ी में शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापक व्यायाम के 33 पदों को डाउनग्रेड करने के लिए वित्त और कार्मिक विभाग से औपचारिक सहमति मिल चुकी है।

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प्रशासनिक अड़चन यह थी कि राष्ट्रीय खेलों के स्वर्ण पदक विजेताओं को 4200 ग्रेड वेतन पर नियुक्ति दी जानी है, जबकि शिक्षा विभाग में व्यायाम शिक्षक का पद 4600 ग्रेड वेतन का है। वहीं रजत और कांस्य पदक विजेताओं के लिए अन्य सरकारी विभागों में 2000 और 2800 ग्रेड वेतन के कई पद पहले से उपलब्ध हैं।

मामले की जानकारी देते हुए खेल मंत्री रेखा आर्य ने बताया कि पदक विजेता खिलाड़ियों की आउट ऑफ टर्न नियुक्ति का प्रस्ताव वर्तमान में वित्त विभाग के पास प्रक्रियाधीन है। वित्त विभाग से अंतिम मंजूरी मिलते ही शिक्षा विभाग की ओर से इस प्रस्ताव को जल्द राज्य कैबिनेट की बैठक में लाया जाएगा।

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खेल विभाग के अनुसार, केवल शिक्षा विभाग ही नहीं बल्कि खेल, युवा कल्याण, गृह, वन और परिवहन विभाग में भी अन्य पदक विजेताओं को नियुक्ति देने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। वित्त विभाग से हरी झंडी मिलने के बाद इन सभी विभागों के प्रस्तावों को भी कैबिनेट की स्वीकृति के लिए पेश किया जाएगा।

खेल मंत्री रेखा आर्य के मुताबिक, आउट ऑफ टर्न नियुक्ति पाने वाले सभी पदक विजेता खिलाड़ियों को प्रारंभिक 6 वर्षों के लिए खेल विभाग से संबद्ध रखा जाएगा। इस दौरान खिलाड़ी अपनी खेल प्रैक्टिस जारी रखने के साथ-साथ राज्य के उभरते खिलाड़ियों को प्रशिक्षण और कोचिंग भी प्रदान करेंगे।

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राज्य सरकार के इस फैसले से उत्तराखंड के राष्ट्रीय पदक विजेता खिलाड़ियों को प्रशासनिक सुरक्षा और बेहतर भविष्य का भरोसा मिला है। इस नीतिगत बदलाव को प्रदेश में खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देने और खेल संस्कृति को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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