देहरादून। देहरादून के परेड ग्राउंड में आयोजित एक भव्य और गरिमामयी समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश के 6 मेधावी बच्चों को पहले ‘मुख्यमंत्री राज्य बाल वीरता पुरस्कार’ से सम्मानित किया। महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग की ओर से वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए शुरू किए गए इस मंच पर विभिन्न विषम परिस्थितियों में अदम्य साहस और सूझबूझ दिखाने वाले इन नन्हे नायकों को स्वर्ण पदक और प्रशस्ति पत्र दिए गए। इसके साथ ही प्रत्येक विजेता के बैंक खाते में डीबीटी के जरिए 51 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि सीधे ट्रांसफर की गई।
इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए राज्य भर से आए आवेदनों में से छह बच्चों का चयन किया गया था, जिनमें चमोली जिले के तीन और चम्पावत, देहरादून व टिहरी गढ़वाल का एक-एक बच्चा शामिल है। सम्मानित होने वाले बच्चों में चमोली की दिव्या, दीपिका और आरव सिंह प्रमुख हैं, जिन्होंने स्कूल परिसर में घुसे भालू के हमले के दौरान अनुकरणीय बहादुरी दिखाई थी। गत 22 दिसंबर 2025 को चमोली के एक विद्यालय में भालू के घुसने पर जब उसने आरव पर हमला किया, तो दिव्या और दीपिका ने अपनी जान की परवाह किए बिना अन्य बच्चों को सुरक्षित किया और आरव की जान बचाई।

इसी तरह चम्पावत की कु. माया ने नदी के तेज उफान में बह रही एक बालिका को अपनी जान जोखिम में डालकर सुरक्षित बाहर निकाला, हालांकि इस दौरान वे खुद भी घायल हो गई थीं। वहीं, देहरादून की कु. आराध्या ने 2 जून 2026 को आए अचानक बादल फटने के कहर के दौरान अद्भुत सतर्कता दिखाई। उन्होंने घर में मौजूद 17 लोगों को समय रहते सुरक्षित बाहर निकाला और तीन साल की एक छोटी बच्ची को पानी के तेज बहाव से सकुशल बचाकर एक बड़ा हादसा टलने में अहम भूमिका निभाई।

जनपद टिहरी गढ़वाल की कु. श्वेता ने भी अपनी तत्परता का परिचय देते हुए सड़क पर तेज रफ्तार वाहन की चपेट में आ रहे एक बुजुर्ग व्यक्ति का हाथ खींचकर उनकी जान बचाई। 30 जनवरी 2025 की इस घटना ने साबित कर दिया कि बहादुरी उम्र की मोहताज नहीं होती।
सरकार की इस अनूठी पहल का उद्देश्य कम उम्र में असाधारण साहस और जिम्मेदारी का परिचय देने वाले इन बच्चों को सम्मानित करना है। इस पुरस्कार के जरिए न केवल इन जांबाज बच्चों के हौसले को सलाम किया गया है, बल्कि यह प्रदेश के अन्य बच्चों के लिए भी एक बड़ी प्रेरणा बन गया है, जो संकट के समय संयम और संवेदनशीलता से काम लेने का संदेश देता है।

