देहरादून। दून में मानसून के कारण नदियों से खनिज निकासी फिलहाल सीमित है, लेकिन बरसात समाप्त होते ही उत्तराखंड सरकार खनन गतिविधियों को नए सिरे से शुरू कर नया राजस्व रिकॉर्ड बनाने की तैयारी में जुट गई है। खनन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, राज्य ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में 1,217 करोड़ रुपये का अब तक का सर्वाधिक खनन राजस्व हासिल किया है।
प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 950 करोड़ रुपये का लक्ष्य तय किया था, जिसे पार करते हुए 1,217 करोड़ रुपये जुटाए गए। इसमें कोषागार में 1,130 करोड़ रुपये, जिला खनिज फाउंडेशन न्यास में 80 करोड़ रुपये और राज्य खनिज अन्वेषण ट्रस्ट में 7 करोड़ रुपये जमा हुए हैं।
तुलनात्मक आंकड़ों पर नजर डालें तो वित्तीय वर्ष 2024-25 में 875 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले 1,041 करोड़ रुपये अर्जित किए गए थे। पिछले 4.5 वर्षों में राज्य के खनन राजस्व में ऐतिहासिक वृद्धि हुई है। वर्ष 2012-13 में जहां विभाग को महज 110 करोड़ रुपये मिलते थे, वहीं 2025-26 में यह आंकड़ा 1,217 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस रिकॉर्ड राजस्व पर कहा कि प्रदेश में अवैध खनन पर अंकुश लगाने के लिए पारदर्शी नीति लागू की गई है। इसी का परिणाम है कि राज्य को 1,217 करोड़ का राजस्व मिला और खनन सुधारों के लिए केंद्र सरकार की ओर से 200 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि भी प्राप्त हुई।
व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए खनिज नीति में सरलीकरण के साथ ‘माइग्रेशन डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन एंड सर्विलांस सिस्टम‘ लागू किया गया है। वैध खनन को बढ़ावा देने और अवैध परिवहन पर नजर रखने के लिए देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और नैनीताल में 45 ई-चेक गेट स्थापित किए गए हैं, जहां एएनपीआर कैमरे और आरएफआईडी तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है।
उत्तराखंड के इन खनन सुधारों को राष्ट्रीय स्तर पर भी बड़ी सराहना मिली है। 28 मार्च 2026 को नई दिल्ली में आयोजित समारोह में राज्य की MTTSS और ई-खन्ना सिक्योरिटी पेपर परियोजनाओं को स्कॉच अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था।
इसके अलावा केंद्रीय खान मंत्रालय की ‘माइनर मिनरल रिफॉर्म’ श्रेणी में उत्तराखंड को देश में दूसरा स्थान मिला, जिसके तहत 100 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि दी गई। वहीं स्टेट माइनिंग रेडीनेस इंडेक्स में बेहतर प्रदर्शन के आधार पर भी राज्य को 100 करोड़ रुपये की अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि मिली है।

