देहरादून। केंद्र सरकार और भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम ने डिजिटल लेनदेन को लेकर एक बड़ा फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि आम ग्राहकों पर यूपीआई इस्तेमाल करने के लिए कोई शुल्क नहीं लगेगा। नई दिल्ली में जारी नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, आम जनता के लिए व्यक्ति-से-व्यक्ति किए जाने वाले सभी लेनदेन पूरी तरह मुफ्त रहेंगे, जबकि 2,000 रुपये से अधिक के कारोबारी भुगतान पर व्यापारियों को 0.40 प्रतिशत की दर से मर्चेंट डिस्काउंट रेट देना होगा।
सरकार द्वारा 2,000 रुपये तक के लेनदेन पर शून्य शुल्क की अधिसूचना जारी करने के बाद NPCI ने इस नई व्यवस्था की विस्तृत जानकारी साझा की। वर्तमान में कुल यूपीआई लेनदेन का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा P2P भुगतान का है, जिस पर कोई चार्ज लागू नहीं होगा। अब यदि कोई ग्राहक किसी व्यापारी को 2,000 रुपये से अधिक की राशि भेजता है, तो केवल संबंधित कारोबारी को 0.40% का शुल्क देना होगा।
यह नया शुल्क व्यवस्था से जुड़े विभिन्न घटकों के बीच विभाजित किया जाएगा, जिसमें संबंधित बैंक और यूपीआई ऐप सेवा प्रदाता शामिल हैं। सरकार का अनुमान है कि इस निर्णय से देश के केवल 4 प्रतिशत कारोबारी ही प्रभावित होंगे, क्योंकि भारत में करीब 96 प्रतिशत व्यावसायिक लेनदेन 2,000 रुपये से कम के ही होते हैं।
छोटे दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों और असंगठित क्षेत्र के व्यापारियों को इस व्यवस्था से पूरी तरह राहत दी गई है। यूपीआई क्यूआर कोड के जरिए हर महीने 1 लाख रुपये तक का भुगतान प्राप्त करने वाले छोटे कारोबारी शून्य एमडीआर (MDR) की श्रेणी में ही बने रहेंगे, जिससे छोटे व्यापार पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा।
एनपीसीआई ने विभिन्न विशेष क्षेत्रों के लिए अलग दरें तय की हैं। रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट जैसे क्षेत्रों में 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर प्रति ट्रांजैक्शन अधिकतम 5 रुपये का ही शुल्क लगेगा। इसके अलावा शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड लेनदेन पर 0.02 प्रतिशत शुल्क तय किया गया है, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये रखी गई है।
अधिसूचना में बैंकों और फिनटेक कंपनियों को कड़ा निर्देश दिया गया है कि कोई भी यूपीआई ऐप कंपनी प्लेटफॉर्म फीस के नाम पर ग्राहकों से पैसा नहीं वसूल सकती। इसके साथ ही बैंक या व्यापारी किसी भी स्थिति में एमडीआर की इस लागत का बोझ आम ग्राहकों की जेब पर स्थानांतरित नहीं करेंगे।
आम यूजर्स की सुविधा के लिए यूपीआई से लेनदेन की मासिक संख्या या कुल राशि पर कोई पाबंदी नहीं लगाई गई है। बैंकों द्वारा तय की गई 1 लाख से 5 लाख रुपये तक की दैनिक भुगतान सीमा केवल साइबर सुरक्षा और धोखाधड़ी से बचाव के उद्देश्य से लागू रहेगी।

