देहरादून। उत्तराखंड में वन्यजीवों के बढ़ते हमलों पर अंकुश लगाने और मानव-वन्यजीव संघर्ष का प्रभावी समाधान निकालने के लिए शासन ने बड़ा फैसला लिया है। राज्य के सभी जिलों में अब ‘जनपद स्तरीय मानव वन्यजीव संघर्ष न्यूनीकरण एवं प्रबंधन समिति’ का गठन किया जाएगा। देहरादून में जारी आदेशों के अनुसार, इन सभी जिला स्तरीय समितियों की कमान संबंधित जिलों के जिलाधिकारी संभालेंगे।
शासन द्वारा गठित की जाने वाली यह 14 सदस्यीय विशेष समिति होगी। इसमें जिले के नोडल डीएफओ को सचिव और अन्य डीएफओ को सदस्य बनाया गया है। समिति में पुलिस, उद्यान, कृषि, शिक्षा, पशुपालन, ऊर्जा निगम व उरेडा के अधिकारियों के साथ संवेदनशील क्षेत्रों के दो ग्राम प्रधान भी शामिल रहेंगे। यह समिति ग्राम स्तर पर संघर्ष वाले हॉट स्पॉट्स की पहचान और मैपिंग करने का काम करेगी। इसके साथ ही त्वरित राहत के लिए क्यूआरटी की तैनाती, ई-सर्विलांस और अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाने के लिए अल्पकालिक व दीर्घकालिक रणनीतियां बनाई जाएंगी।
वन्यजीवों के हमलों को रोकने के लिए गांवों व स्कूलों के स्तर पर बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। इसके अलावा किसानों को उन वैकल्पिक फसलों की जानकारी दी जाएगी, जिन्हें वन्यजीव नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। समिति की तीन महीने में कम से कम एक बैठक होना अनिवार्य किया गया है। प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव नीना ग्रेवाल ने राज्य के सभी निदेशकों और डीएफओ को पत्र भेजकर इस दिशा में तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि जिला स्तर पर समितियों का गठन जल्द से जल्द पूरा किया जाए।
शासकीय आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में वन्यजीवों के हमले काफी घातक साबित हो रहे हैं। इस साल जनवरी से सितंबर के बीच वन्यजीवों के हमलों में 55 लोगों की दर्दनाक मौत हुई है, जबकि 407 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो सबसे ज्यादा 154 लोग बंदर और लंगूर के हमलों में घायल हुए हैं। वहीं सांप के काटने से 102, तेंदुए के हमले में 75 और भालू के हमले में 40 लोग जख्मी हुए हैं। तेंदुए और बाघ के हमलों में कुल 29 लोगों की जान गई है, जिनमें केवल तेंदुए के हमलों में ही 17 मौतें दर्ज की गई हैं।

