उत्तराखंड में फल और सब्जियों में कीटनाशकों के अंधाधुंध इस्तेमाल को देखते हुए प्रदेश सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। जन स्वास्थ्य की रक्षा के लिए खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FDA) और कृषि विभाग मिलकर अब पूरे प्रदेश में एक संयुक्त जागरूकता अभियान चलाएंगे। इस पहल का मुख्य उद्देश्य खाने-पीने की चीजों में हानिकारक रसायनों के अवशेषों को कम करना और विक्रेताओं को मानकों के प्रति सचेत करना है।
जांच के लिए सैंपल लेने की प्रक्रिया शुरू
- खाद्य संरक्षा विभाग ने प्रदेश भर से फल और सब्जियों के नमूने लेकर उनकी जांच शुरू कर दी है।
- अब तक आम, केला, पपीता और तरबूज जैसे फलों के लगभग 39 नमूने जांच के लिए लैब भेजे जा चुके हैं।
- यह कार्रवाई खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन आयुक्त सचिन कुर्वे के निर्देशों पर की जा रही है।
कीटनाशकों का अवशेष बना स्वास्थ्य के लिए चुनौती
- भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के सर्विलांस अभियान में पुष्टि हुई है कि कृषि क्षेत्रों में कीटनाशकों के अवैज्ञानिक उपयोग से खाद्य पदार्थों में तय मानकों से अधिक अवशेष मिल रहे हैं।
- यह स्थिति आम जनता के स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर चुनौती बनती जा रही है।
- इसे रोकने के लिए किसानों के बीच कार्यशालाएं आयोजित करने और स्थानीय मंडियों के व्यापारियों को जागरूक करने की योजना बनाई गई है।
चारधाम यात्रा और पर्यटन सीजन को लेकर विशेष निर्देश
- मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वर्तमान में चल रही चारधाम यात्रा और पर्यटन सीजन को देखते हुए मिलावटखोरों पर सख्ती के निर्देश दिए हैं।
- उन्होंने सभी विभागों को मिलकर काम करने को कहा है ताकि बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को शुद्ध खाद्य पदार्थ मिल सकें।
- खाद्य पदार्थों में मिलावट और हानिकारक रसायनों के उपयोग को रोकने के लिए विभाग को निरंतर निरीक्षण करने के आदेश दिए गए हैं।
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