देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने निजी संस्थाओं को लीज पर दी गई 16,827.788 हेक्टेयर आरक्षित वन भूमि की गहन जांच के लिए बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन के आदेश पर राज्य और जिला स्तर पर कुल 14 विशेष जांच दल का गठन किया गया है। सरकार ने साफ किया है कि लीज की शर्तों का उल्लंघन करने वाली संस्थाओं से जमीन तत्काल वापस ले ली जाएगी।
मुख्य सचिव के निर्देशों के मुताबिक, यह जांच व्यवस्था दो स्तरों पर काम करेगी ताकि हर मामले की निष्पक्ष पड़ताल हो सके। प्रदेश में लंबे समय से राजस्व विभाग के अधीन आने वाली आरक्षित वन भूमि निजी लोगों और संस्थाओं को लीज पर दी जाती रही है। अब सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि इस बेशकीमती जमीन का उपयोग तय शर्तों के अनुरूप ही हो रहा है या नहीं।
जिला स्तरीय एसआईटी की कमान संबंधित जिले के जिलाधिकारी को सौंपी गई है। इस टीम में एडीएम को सदस्य सचिव, जबकि एसडीएम और प्रभागीय वनाधिकारी को सदस्य बनाया गया है। आवश्यकता पड़ने पर अध्यक्ष अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों को विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल कर सकेंगे।
जिला स्तर पर गठित यह एसआईटी हर हफ्ते वन भूमि से जुड़े मामलों की स्थलीय जांच और समीक्षा करेगी। टीम मौके पर जाकर जांचेगी कि भूमि का व्यावसायिक या अन्य उपयोग लीज की शर्तों के अनुसार ही हो रहा है। यदि किसी भी स्तर पर नियमों की अनदेखी पाई गई, तो जमीन का आवंटन रद्द करने की संस्तुति की जाएगी।
राज्य स्तरीय एसआईटी की अध्यक्षता वन विभाग के प्रमुख सचिव करेंगे। इस उच्चस्तरीय टीम में सचिव, राजस्व सचिव, राजस्व परिषद आयुक्त, प्रमुख वन संरक्षक, प्रमुख वन संरक्षक और वन संरक्षण के नोडल अधिकारी शामिल हैं।
जिला स्तरीय टीमें लीज भूमि को बरकरार रखने या उसे वापस लेने संबंधी अपनी रिपोर्ट राज्य स्तरीय एसआईटी को भेजेंगी। इसके बाद प्रमुख सचिव-वन की अध्यक्षता वाली राज्य स्तरीय एसआईटी हर 15वें दिन बैठक कर जिला टीमों की सिफारिशों पर अंतिम समीक्षा करेगी और नियमानुसार जमीन वापसी की कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाएगी।

