उत्तराखंड ने वित्तीय प्रबंधन और आय बढ़ाने में हिमाचल को पछाड़ा, मिला देश में दूसरा स्थान

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देहरादून। उत्तराखंड ने सीमित संसाधनों, भौगोलिक विषमताओं और प्राकृतिक आपदाओं के बावजूद अपने वित्तीय प्रबंधन में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है। केंद्र सरकार की स्वायत्तशासी संस्था अरुण जेटली राष्ट्रीय वित्तीय प्रबंधन संस्थान की बेहतर वित्तीय प्रबंधन वाले दस हिमालयी राज्यों की ताजा रैंकिंग में उत्तराखंड को अरुणाचल प्रदेश के बाद दूसरा स्थान मिला है। इस रैंकिंग में पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश छठे स्थान पर खिसक गया है।

ताजा रिपोर्ट वित्तीय वर्ष 2025-26 के रिकॉर्ड पर आधारित है। AJNIFM ने मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन और वित्त सचिव को यह रिपोर्ट भेजते हुए भविष्य के नीतिगत निर्णयों में इसका उपयोग करने का सुझाव दिया है। यह लगातार दूसरा मौका है जब बेहतर वित्तीय प्रदर्शन के मामले में उत्तराखंड ने हिमालयी राज्यों में अपना उच्च स्थान कायम रखा है।

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रिपोर्ट के अनुसार, अपने आंतरिक संसाधनों के कुशलतापूर्वक उपयोग और आमदनी के नए स्रोत तैयार करने में सभी हिमालयी राज्यों में उत्तराखंड पहले पायदान पर है। राज्य गठन के समय वर्ष 2000-01 में जहां उत्तराखंड का अपने स्रोतों से राजस्व मात्र 233 करोड़ रुपये था, वहीं अब यह 51 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी के साथ 11,862.30 करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस उपलब्धि पर संतोष जताते हुए कहा कि सरकार ने कठोर वित्तीय अनुशासन और राजस्व बढ़ाने के लिए कई ठोस कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि खनन, पर्यटन और अन्य क्षेत्रों में किए गए नए प्रयोगों से राजस्व में भारी वृद्धि हुई है और आज उत्तराखंड पर्यटकों व फिल्म निर्माताओं की पहली पसंद बन चुका है।

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हालांकि इस शानदार प्रदर्शन के बीच, वित्तीय खर्चों पर नियंत्रण रखना अब भी सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। घाटा प्रबंधन के मामले में उत्तराखंड दस राज्यों की सूची में पांचवें स्थान पर है। आंकड़ों के मुताबिक, राज्य की कुल आमदनी का करीब 28 प्रतिशत हिस्सा कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और मानदेय के भुगतान में जा रहा है।

इसके अतिरिक्त, पेंशन भुगतान में 12.50 प्रतिशत हिस्सा खर्च हो रहा है, जबकि विभिन्न कर्जों के ब्याज और लाभांश अदायगी में बजट का 09 प्रतिशत हिस्सा निकल जाता है। इस प्रकार कमाई का एक बड़ा हिस्सा अनिवार्य प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में खर्च हो रहा है।

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इस वित्तीय दबाव से उबरने के लिए राज्य सरकार का मुख्य फोकस पर्यटन विस्तार और ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने पर है। खनन और जीएसटी समेत अन्य क्षेत्रों में किए गए सुधारों का लाभ भी अर्थव्यवस्था को मिल रहा है। निवेश को बढ़ावा देने के लिए प्रशासन ने 30 से अधिक नीतियों का सरलीकरण भी किया है।

रिपोर्ट दर्शाती है कि उत्तराखंड ने हालिया वर्षों में न केवल अपने आय स्रोतों को बढ़ाया है, बल्कि अर्थव्यवस्था के समग्र आकार को भी मजबूत किया है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि राजस्व घाटा प्रबंधन में अभी और सुधार करने की व्यापक गुंजाइश बनी हुई है।