उत्तराखंड में आपदा और हादसों का कहर, 8 माह में 289 लोगों की मौत

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देहरादून। उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदाओं और लगातार बढ़ रहे भीषण सड़क हादसों का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। सरकारी आंकड़ों से सामने आई नई रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में सड़क हादसे अब प्राकृतिक आपदाओं की तुलना में कहीं अधिक जानलेवा साबित हो रहे हैं।

राज्य में इस वर्ष 1 जनवरी से अब तक आपदाओं और सड़क दुर्घटनाओं को मिलाकर कुल 289 लोगों की अकाल मृत्यु हो चुकी है। इन कुल मौतों में सड़क हादसों की हिस्सेदारी सर्वाधिक 85.12 प्रतिशत पाई गई है, जबकि आपदा के कारण 14.88 प्रतिशत लोगों ने अपनी जान गंवाई है।

आंकड़ों के अनुसार, 1 जनवरी से अब तक हुए भीषण सड़क हादसों में 246 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 878 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं और 9 लोग अभी भी लापता हैं। यदि इसका रोजाना औसत निकाला जाए तो प्रदेश की सड़कों पर हर दिन एक से अधिक व्यक्ति हादसे का शिकार होकर अपनी जान गंवा रहा है।

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सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में पहाड़ी और मैदानी दोनों क्षेत्र प्रभावित हैं। सबसे ज्यादा हादसे और मौतें टिहरी, देहरादून, नैनीताल, पिथौरागढ़ और अल्मोड़ा जैसे जिलों में दर्ज की गई हैं। इन जिलों की सड़कों पर यातायात सुरक्षा और ओवरस्पीडिंग को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

दूसरी ओर, 1 अप्रैल से अब तक राज्य में आई प्राकृतिक आपदाओं ने भी भारी तबाही मचाई है। आपदा के कारण अब तक 43 लोगों की जान जा चुकी है, 46 लोग घायल हुए हैं और 1 व्यक्ति लापता है। इन मौतों में 10 मामले मानव-वन्यजीव संघर्ष के भी शामिल हैं।

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प्राकृतिक आपदाओं के पैटर्न का विश्लेषण करें तो औसतन हर तीन से चार दिन में आपदा के कारण एक व्यक्ति की मृत्यु हो रही है। मानसूनी बारिश, भूस्खलन और नदियों के उफान के साथ-साथ जंगलों से सटे इलाकों में मानव और वन्यजीवों का आमना-सामना भी जानलेवा साबित हो रहा है।

आपदा ने जनहानि के साथ-साथ प्रदेश के पशुधन और निजी व सार्वजनिक संपत्तियों को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। आंकड़ों के मुताबिक, राज्य भर में आपदा के कारण अब तक 826 पशुओं की मौत हो चुकी है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर सीधी चोट है।

इसके अलावा, प्राकृतिक आपदाओं की वजह से प्रदेश में 1200 से अधिक मकान आंशिक या पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। बेघर हुए परिवारों के पुनर्वास और राहत सामग्री पहुंचाने में स्थानीय प्रशासन को कड़ी मशक्कत का सामना करना पड़ रहा है।

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हादसों और प्राकृतिक आपदाओं को मिलाकर प्रदेश में अब तक 900 से अधिक लोग घायल हो चुके हैं। घायलों में से कई लोग ऐसे हैं जो स्थाई दिव्यांगता का शिकार हुए हैं या अस्पतालों में जीवन और मौत के बीच जूझ रहे हैं।

आंकड़ों की यह डरावनी तस्वीर उत्तराखंड शासन, पुलिस प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग के सामने राहत व बचाव के साथ-साथ सड़क सुरक्षा के कड़े इंतजाम करने की सख्त चुनौती पेश कर रही है।

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