देहरादून। राजधानी स्थित दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में तकनीकी विफलता और प्रशासनिक लापरवाही के कारण मरीजों की ऑनलाइन रक्त जांच रिपोर्ट मिलने की व्यवस्था दो साल बाद भी ठप पड़ी है। एक तरफ जहां छोटे निजी पैथोलॉजी लैब सीधे मरीजों के व्हाट्सएप पर रिपोर्ट भेज देते हैं, वहीं इस प्रमुख सरकारी अस्पताल में रोजाना जांच कराने वाले करीब 500 मरीज रिपोर्ट के लिए धक्के खाने को मजबूर हैं।
मरीजों को ऑनलाइन रिपोर्ट न मिलने की मुख्य वजह पीओसीटी लैब और अस्पताल के पोर्टल का आपस में लिंक न हो पाना है। लैब का पोर्टल अपग्रेड होने के बाद अब व्हाट्सएप सर्विस के लिए अस्पताल का ‘मेटा अकाउंट’ नहीं खुल पा रहा है। यह अकाउंट लैब के स्तर से खुलना है, लेकिन अस्पताल प्रशासन की ओर से जरूरी दस्तावेज उपलब्ध न कराए जाने के कारण ऑनलाइन व्यवस्था पूरी तरह अटकी हुई है।
अस्पताल में ऑनलाइन रिपोर्ट ही नहीं, बल्कि 1.5 करोड़ रुपये की लागत से लगा ‘न्यूमेटिक ट्यूब सिस्टम’ भी दो साल से बंद पड़ा है। इस सिस्टम का काम वार्डों तक रिपोर्ट और नमूने पहुंचाना था। करीब आठ महीने पहले इंजीनियरों ने इसका निरीक्षण किया था, लेकिन इसके बावजूद न तो सिस्टम चालू हुआ और न ही मरीजों की राहत की कोई व्यवस्था बनी।
अस्पताल में बिगड़ती व्यवस्था और स्वास्थ्य निदेशक डॉ. आशुतोष सयाना की सख्त नाराजगी के बाद प्रशासन हरकत में आया है। प्राचार्य और एमएस के निर्देश पर सेंट्रल लैब प्रभारी ने पीओसीटी मैनेजर को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा है कि बार-बार कहने के बावजूद मरीजों को व्हाट्सएप या एसएमएस से रिपोर्ट देने की सुविधा शुरू क्यों नहीं की गई।
लैब प्रबंधन का कहना है कि उनका सॉफ्टवेयर तैयार है, लेकिन अस्पताल का मेटा अकाउंट खोलने के लिए जरूरी कागजात नहीं मिले हैं। दस्तावेज मिलते ही दोनों सॉफ्टवेयर लिंक कर दिए जाएंगे। उधर, डिप्टी एमएस डॉ. विनम्र मित्तल ने बताया कि सोमवार को लैब संचालकों को बुलाकर दस्तावेजों की जानकारी ली जाएगी और समस्या का जल्द निस्तारण किया जाएगा।

