देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में साइबर ठगी की काली कमाई को ठिकाने लगाने वाले ‘म्यूल’ बैंक खातों के खिलाफ पुलिस ने अब तक का बड़ा अभियान शुरू किया है। देहरादून के चार प्रमुख थानों पटेलनगर, नेहरू कॉलोनी, बसंत विहार और कैंट में शनिवार शाम एक साथ छह मुकदमे दर्ज किए गए हैं। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेंद्र डोबाल के सख्त निर्देश पर हुई इस कार्रवाई में 33 ऐसे संदिग्ध बैंक खाते चिन्हित किए गए हैं, जिनमें दूसरे राज्यों से ठगी का पैसा जमा कर आगे ट्रांसफर किया जा रहा था।
पुलिस की यह ताबड़तोड़ कार्रवाई राष्ट्रीय साइबर अपराध समन्वय पोर्टल के ‘प्रतिबिंब ऐप’ और साइबर सेल से मिले इनपुट के आधार पर की गई है। वित्तीय जांच और तकनीकी विश्लेषण में सामने आया कि इन बैंक खातों का इस्तेमाल देश के अलग-अलग हिस्सों में हुई ऑनलाइन साइबर ठगी की रकम को सफेद करने और लेयरिंग के लिए किया जा रहा था। जांच में पाया गया कि कुछ खाताधारकों ने कमीशन के लालच में खुद म्यूल अकाउंट चलाए, जबकि कुछ लोगों ने जानबूझकर अपने खाते साइबर अपराधियों को किराए पर दे दिए थे।
थानावार दर्ज मुकदमों की बात करें तो पटेलनगर थाने में आईएसबीटी चौकी प्रभारी जयवीर सिंह की तहरीर पर दो मुकदमे दर्ज हुए हैं। इनमें शिमला बाईपास रोड स्थित बैंक ऑफ इंडिया के 20 और ट्रांसपोर्टनगर स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा के सात संदिग्ध खाते शामिल हैं। वहीं, नेहरू कॉलोनी थाने में उपनिरीक्षक निशा पांडे की रिपोर्ट पर दो मुकदमे दर्ज किए गए हैं, जिसमें जोगीवाला स्थित पंजाब एंड सिंध बैंक के खाताधारक प्रदीप सागर और हरिद्वार रोड स्थित बैंक ऑफ इंडिया के खाताधारक रोहित को नामजद किया गया है।
बसंत विहार थाने में उपनिरीक्षक शशि पुरोहित की रिपोर्ट पर बैंक ऑफ बड़ौदा, एक्सिस बैंक और इंडियन ओवरसीज बैंक के तीन संदिग्ध खातों की जांच शुरू की गई है। पुलिस इन खातों से जुड़े मोबाइल नंबर, ई-मेल और यूपीआई आईडी की गहन पड़ताल कर रही है। इसके अलावा, कैंट थाने में उपनिरीक्षक मिथुन कुमार की तहरीर पर यूको बैंक डाकरा बाजार के एक खाते पर केस दर्ज हुआ है। इस खाते की पहली लेयर में ही ठगी के ₹50 हजार और अन्य खातों में ₹20 हजार जमा पाए गए हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अब सभी संदिग्ध खातों की बैंक स्टेटमेंट, केवाईसी दस्तावेज, मोबाइल नंबरों के आईपी एड्रेस और संबंधित डिवाइस की डिटेल जुटाने में लग गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साक्ष्यों के आधार पर खाताधारकों की वास्तविक भूमिका तय की जाएगी और ठगी का नेटवर्क चलाने वाले मुख्य साइबर अपराधियों तक पहुंचने की हर संभव कोशिश की जाएगी। दोषी पाए जाने पर किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
साइबर अपराध के बढ़ते खतरे को देखते हुए देहरादून पुलिस ने आम जनता के लिए भी सख्त चेतावनी और गाइडलाइन जारी की है। पुलिस ने साफ किया है कि अपना बैंक खाता कभी किसी अनजान व्यक्ति को इस्तेमाल या किराए पर न दें और न ही कमीशन के लालच में किसी के पैसे अपने खाते में मंगवाएं। अपने खाते का यूपीआई पिन, ओटीपी या इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड किसी से साझा न करें। यदि खाते में अचानक कोई अनजान रकम आ जाए, तो उसे तुरंत बैंक और पुलिस को सूचित करें।

