देहरादून। उत्तराखंड में मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) अभियान को पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने के लिए निर्वाचन आयोग ने प्रशासनिक कसावट बढ़ा दी है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कुमाऊं और गढ़वाल मंडलों के आयुक्तों तथा सभी 13 जिलों के जिलाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। देहरादून मुख्यालय से हुई इस उच्चस्तरीय बैठक में सीईओ ने सख्त निर्देश दिए कि फील्ड में तैनात बीएलओ और कर्मचारियों को लगातार प्रोत्साहित किया जाए।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, अतिवृष्टि या भूस्खलन से प्रभावित दुर्गम क्षेत्रों में विसंगति वाले मामलों के निस्तारण के लिए बीएलओ स्वयं मतदाताओं के पास जाकर दस्तावेज प्राप्त करेंगे और अपने स्तर पर रिपोर्ट लगाकर कार्रवाई पूरी करेंगे।
इसके साथ ही, अनमैप्ड मतदाताओं की सुनवाई और उनके नाम जोड़ने के लिए ईआरओ व एईआरओ स्तर के अधिकारियों को सुविधाजनक रणनीति बनाने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों को दफ्तरों से निकलकर सीधे मतदाताओं से जनसंवाद करने को कहा गया है ताकि किसी भी तरह का भ्रम न रहे, जबकि देहरादून, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर जैसे अधिक आबादी वाले जिलों के जिलाधिकारियों को नोटिसों की त्वरित व पारदर्शी सुनवाई के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर उस पर अमल करने के निर्देश दिए गए हैं।
बैठक में सीईओ पुरुषोत्तम ने कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत और गढ़वाल आयुक्त आनंद स्वरुप द्वारा हाल ही में किए गए जनपदीय भ्रमण का फीडबैक लिया। उन्होंने दोनों मंडलायुक्तों को नियमित रूप से फील्ड विजिट जारी रखने के निर्देश दिए ताकि जमीनी स्तर पर चुनावी तैयारियों का सही आकलन हो सके। इस समीक्षा बैठक में अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे, उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी किशन सिंह नेगी और सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी मस्तू दास सहित दोनों मंडलों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

