देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई उत्तराखंड कैबिनेट की बैठक में राज्य के विकास और जनहित से जुड़े 17 बड़े प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई। मुख्यमंत्री के अपर सचिव बंशीधर तिवारी ने निर्णयों की ब्रीफिंग करते हुए बताया कि कैबिनेट ने ‘उत्तराखंड राज्य सहकारिता नीति-2026’ को हरी झंडी दे दी है, जिसके लिए सात मुख्य मिशन तय किए गए हैं।
कैबिनेट ने उत्तराखंड मोटरयान कराधान सुधार अधिनियम को मंजूरी देते हुए सीएनजी वाहनों को ग्रीन सेस में मिलने वाली छूट को जारी रखने का फैसला किया है, जबकि हाइब्रिड वाहनों को दी जा रही कर छूट वापस ले ली गई है। इसके अलावा, अन्य राज्यों की नीतियों का अध्ययन कर उत्तराखंड की नई इलेक्ट्रिक वाहन नीति तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
राज्य के हजारों उपनल कर्मचारियों के लिए कैबिनेट ने बड़ा फैसला लेते हुए तीन चरणों में ‘समान कार्य-समान वेतन’ लागू करने की व्यवस्था की है। 9 नवंबर से शुरू हो रहे दूसरे चरण के तहत 2018 तक के कर्मचारियों को यह लाभ मिलेगा। साथ ही 2016 से ब्रेक वाले कर्मियों को महंगाई भत्ता देने और नए पदों के सृजन का रास्ता साफ किया गया है।
ऊर्जा क्षेत्र में सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन के 1320 मेगावाट कोयला आधारित पावर प्लांट की जिम्मेदारी 25 साल के लिए सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी अडानी पावर को दी है। इस प्लांट के लिए छत्तीसगढ़ में कोल ब्लॉक पहले ही आवंटित हो चुका है।
स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में ‘उत्तराखंड मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन’ के गठन को मंजूरी दी गई है, जो दवाओं और सर्जिकल सामान की पारदर्शी खरीद करेगा। इसके अलावा हरिद्वार में राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र के लिए एक एकड़ जमीन देने का निर्णय लिया गया है।
कैबिनेट ने ‘उत्तराखंड लोकायुक्त खोजबीन समिति 2026’ और आबादी सर्वेक्षण नियमावली को मंजूरी दी। रिस्पना किनारे काठ बंगला बस्ती के 116 मकानों के लिए लाभार्थियों से ली जाने वाली 10% धनराशि का भुगतान अब सरकार खुद करेगी। इसके अलावा अग्निवीरों के लिए 6 पदों का समर्पित सेल बनाने और शहीद जवानों की उनके पैतृक गांवों में मूर्तियां लगाने का ऐतिहासिक फैसला लिया गया है।

