देहरादून। उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और प्रदेश चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष डॉ. हरक सिंह रावत के एक ताजा बयान ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। देहरादून में अपने आधिकारिक सोशल मीडिया माध्यम से बयान जारी करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें विधानसभा चुनाव लड़ने या विधायक बनने की कोई लालसा नहीं है। उन्होंने कहा कि उनका एकमात्र लक्ष्य प्रदेश में कांग्रेस पार्टी की सरकार बनाना है। उनके इस रुख को आगामी चुनावों में टिकट के दावेदारों के लिए एक सख्त संदेश माना जा रहा है।
वरिष्ठ नेता हरक सिंह रावत ने टिकट वितरण के मापदंडों पर अपनी बात रखते हुए कहा कि जो भी दावेदार चुनाव जीतने की स्थिति में नहीं है, पार्टी को उसे किसी भी हाल में चुनावी मैदान में नहीं उतारना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह नियम उन पर भी लागू होता है और यदि वे खुद चुनाव जीतने की स्थिति में नहीं हैं, तो पार्टी को उन्हें भी टिकट नहीं देना चाहिए। उनका उद्देश्य पद पाना नहीं, बल्कि पार्टी की सत्ता में वापसी सुनिश्चित करना है।
सहसपुर विधानसभा सीट का जिक्र करते हुए हरक सिंह रावत ने कहा कि यदि पार्टी को लगता है कि वहां उनके अलावा कोई अन्य प्रत्याशी जीतने की अधिक क्षमता रखता है, तो उसे ही टिकट दिया जाना चाहिए। उन्होंने राज्य के मौजूदा सियासी परिदृश्य को रेखांकित करते हुए बताया कि आगामी विधानसभा चुनाव के लिए हर सीट पर 5 से 10 मजबूत दावेदार हैं। फिलहाल राज्य की 70 सीटों में से कांग्रेस के पास 20 विधायक हैं, जबकि 50 सीटों पर पार्टी को बढ़त बनानी है।
चुनाव जीतने की गणित पर बात करते हुए डॉ. हरक सिंह रावत ने एक अनोखी ’25 प्रतिशत थ्योरी’ साझा की। उन्होंने समझाया कि किसी भी चुनाव में 25 प्रतिशत भूमिका पार्टी के पक्ष में माहौल की होती है, 25 प्रतिशत योगदान प्रत्याशी के व्यक्तिगत प्रभाव का होता है, 25 प्रतिशत सफलता सामाजिक और जातीय समीकरणों पर निर्भर करती है, जबकि शेष 25 प्रतिशत हिस्सा प्रत्याशी की आर्थिक और रणनीतिक क्षमता पर टिका होता है।
हरक सिंह रावत के इस बयान से साफ है कि कांग्रेस के भीतर टिकट बंटवारे का मुख्य आधार केवल वरिष्ठता नहीं, बल्कि प्रत्याशी की जीत की संभावना होगी। उनके इस बयान के बाद पार्टी के भीतर दावेदारों के बीच अपनी-अपनी जीत की दावेदारी को लेकर सरगर्मी बढ़ गई है।

