Uttarakhand SIR: इन 3 जिलों में काटे जा रहे सर्वाधिक वोट, एक नाम के पीछे दर्ज हुईं 5906 आपत्तियां

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देहरादून। उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाने और संशोधनों को लेकर दर्ज आपत्तियों ने राज्य निर्वाचन आयोग को चौकन्ना कर दिया है। प्रदेश के तीन मैदानी जिलों नैनीताल, ऊधमसिंह नगर और हरिद्वार में फॉर्म-10 के तहत मतदाता सूची से नाम काटने की सबसे ज्यादा आपत्तियां सामने आई हैं। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने इन तीनों जिलों में विशेष निगरानी के लिए नौ आईएएस और पीसीएस अधिकारियों को बतौर पर्यवेक्षक तैनात कर दिया है।

आयोग ने साफ रुख अपनाया है कि किसी भी मतदाता का नाम बिना आपत्तिकर्ता और संबंधित नागरिक को नोटिस जारी कर व्यक्तिगत सुनवाई किए नहीं हटाया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया और मतदाता सूची में अपना नाम जांचने या दावे-आपत्ति की स्थिति देखने के लिए नागरिक मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तराखंड के आधिकारिक पोर्टल का उपयोग कर सकते हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय स्तर पर चुनाव संबंधी सेवाओं के लिए भारत निर्वाचन आयोग (ECI) का वोटर सर्विस पोर्टल उपलब्ध है।

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इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चौंकाने वाला मामला ऊधमसिंह नगर जिले की किच्छा विधानसभा क्षेत्र से सामने आया है। यहां अकेले ‘राजेश तिवारी’ नामक व्यक्ति के नाम से 5,906 आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं, जिसने प्रशासनिक अधिकारियों के कान खड़े कर दिए हैं। नियमों के मुताबिक एक व्यक्ति पांच या उससे अधिक आपत्तियां दर्ज कर सकता है, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में एक ही नाम से आवेदन आना किसी राजनीतिक षड्यंत्र की ओर भी इशारा कर रहा है। राज्यभर में अब तक 40,906 लोग घर पर न मिलने या स्थायी रूप से शिफ्ट होने की श्रेणी में दर्ज किए गए हैं।

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चुनाव आयोग के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह सत्यापित करना है कि क्या ये 40 हजार से ज्यादा मतदाता वास्तव में अपना निवास बदल चुके हैं या फिर यह नाम काटने की कोई साजिश है। यदि मतदाता वास्तव में दूसरी जगह चला गया है, तो पुराने पते पर उसका नाम बने रहना प्रक्रियात्मक चूक है। वहीं, अगर वह वहीं रह रहा है और फर्जी आपत्ति दर्ज हुई है, तो यह गंभीर अपराध है। आयोग अब राजनीतिक मंशा और प्रशासनिक लापरवाही दोनों पहलुओं की गहनता से जांच कर रहा है।

स्थिति की समीक्षा के लिए मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने सोमवार को कुमाऊं और गढ़वाल के मंडल आयुक्तों के साथ-साथ देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर के जिलाधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए गए कि सभी दावों और आपत्तियों का निस्तारण केवल नियमों के तहत हो। यदि प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही पाई गई, तो उसकी सीधी जिम्मेदारी तय करते हुए सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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समीक्षा बैठक के दौरान आयोग ने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिन मतदान केंद्रों पर 4 प्रतिशत से अधिक नाम जोड़ने या 2 प्रतिशत से अधिक नाम हटाने की संभावना है, वहां संबंधित निर्वाचक निबंधन अधिकारी खुद मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन करें। बैठक में गढ़वाल कमिश्नर आनंद स्वरूप और कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत ने भी अपने-अपने क्षेत्रों के मैदानी निरीक्षण का फीडबैक साझा किया। आयोग ने अधिकारियों को जिला स्तर पर राजनीतिक दलों और मीडिया के साथ लगातार संवाद बनाए रखने के निर्देश दिए हैं।

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