इंटरनेट और सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर इन दिनों व्यंग्य और कटाक्ष के माध्यम से एक बेहद अनोखी वर्चुअल राजनीतिक जंग छिड़ी हुई है, जिसने नेटिज़न्स का ध्यान अपनी ओर खींचा है। हाल ही में अस्तित्व में आई ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ को सीधी चुनौती देने के लिए अब ‘ओगी जनता पार्टी’ नामक एक नई वर्चुअल पार्टी मैदान में उतर चुकी है।
कार्टून कैरेक्टर ‘ओगी’ को अपना मुख्य चेहरा बनाकर पेश करने वाली ओजेपी ने सीजेपी के सोशल मीडिया अभियानों, उनके इरादों और उनके वास्तविक राजनीतिक संपर्कों पर कड़े सवाल उठाए हैं। अस्तित्व में आने के कुछ ही समय के भीतर इन दोनों आभासी दलों के बीच छिड़ी यह डिजिटल सियासी जंग काफी दिलचस्प हो चुकी है, जिसके दावे और पोस्टर इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहे हैं और आम लोग भी इन पर जमकर अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
दोनों पार्टियों की विचारधारा, उद्देश्य और तीखे सवाल
ओगी जनता पार्टी ने सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके के राजनीतिक झुकाव पर सवाल उठाते हुए उनके आम आदमी पार्टी के साथ पुराने रिश्तों को उजागर किया है। ओजेपी का दावा है कि उनका खुद का कोई छिपा हुआ राजनीतिक एजेंडा नहीं है और वे केवल कड़वी सच्चाइयों को सामने लाना चाहते हैं, जबकि उनकी आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार उनका मुख्य उद्देश्य हर तरह के ‘कॉकरोच’ को खत्म करना है।
इसके उलट, कॉकरोच जनता पार्टी ने ‘कॉकरोच नेवर डाई’ को अपनी टैगलाइन बनाया है। इस बीच ओजेपी ने पशु अधिकारों को लेकर एक छह सूत्रीय घोषणापत्र भी जारी किया है, जिसमें देश में लावारिस पशुओं की बेहतर देखभाल और पशु क्रूरता के खिलाफ सख्त कानून बनाने की वकालत करते हुए मौजूदा व्यवस्था पर तीखा व्यंग्य किया गया है।
सोशल मीडिया पर तेजी से बढ़ते फॉलोअर्स और नीट पेपर लीक का मुद्दा
इस वर्चुअल लड़ाई का असर दोनों पार्टियों के डिजिटल ग्राफ पर साफ देखा जा सकता है, जहां सीजेपी के इंस्टाग्राम फॉलोअर्स की संख्या 2.1 करोड़ तक पहुंच चुकी है, वहीं ओजेपी के सोशल मीडिया अकाउंट्स पर भी फॉलोअर्स बेहद तेजी से बढ़ रहे हैं। इस अनोखी डिजिटल जंग के बीच दोनों ही पक्ष गंभीर सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दों को भी उठा रहे हैं।
ओजेपी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्टर साझा कर नीट पेपर लीक विवाद को उठाते हुए प्रभावित छात्रों के लिए न्याय की मांग की है। दूसरी तरफ, कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक ने भी इस मुद्दे पर एक ऑनलाइन पिटीशन शुरू की है, जिसमें शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की गई है और इस डिजिटल पिटीशन पर अब तक करीब पांच लाख के आसपास लोग अपने हस्ताक्षर कर सिस्टम की कमियों पर सवाल उठा चुके हैं।

