केंद्रीय जांच ब्यूरो ने नीट-यूजी पेपर लीक मामले में एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए महाराष्ट्र के पुणे से एक और महिला लेक्चरर मनीषा संजय हवलदार को गिरफ्तार किया है। आरोपी मनीषा पुणे की सेठ हीरालाल सराफ प्रशाला में कार्यरत हैं, जिन्हें राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने परीक्षा के सफल संचालन के लिए बतौर विशेषज्ञ अपने पैनल में शामिल किया था। सीबीआई के अनुसार, पैनल का हिस्सा होने के कारण मनीषा की पहुंच नीट-यूजी के फिजिक्स के पेपर तक हो गई थी और उन्होंने कथित तौर पर इसी का फायदा उठाकर पेपर लीक किया।
इस हाई-प्रोफाइल मामले में देशव्यापी जांच और छापेमारी के बाद जांच एजेंसी अब तक दिल्ली, जयपुर, गुरुग्राम, नासिक, पुणे, लातूर और अहिल्यानगर जैसे विभिन्न शहरों से कुल 11 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिससे इस रैकेट के असली स्रोतों और बिचौलियों का पर्दाफाश करने में बड़ी मदद मिली है।
पेपर लीक का अहम जरिया बनीं महिला लेक्चरर
जांच में यह बात सामने आई है कि मनीषा संजय हवलदार इस पूरे पेपर लीक नेटवर्क की एक बेहद मजबूत और अहम कड़ी थीं। आधिकारिक तौर पर एनटीए के विशेषज्ञ पैनल में शामिल होने की वजह से उनके पास मूल प्रश्नपत्र की सीधी पहुंच थी, जिसका दुरुपयोग करते हुए उन्होंने परीक्षा से पहले ही इसे बाहर लीक कर दिया।
CBI ने इससे पहले पुणे की ही दो अन्य महिला लेक्चरर मनीषा मांधरे और मनीषा वाघमारे को भी गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी की पड़ताल के मुताबिक, मनीषा मांधरे ने अप्रैल के महीने में मनीषा हवलदार के साथ कुछ महत्वपूर्ण पेपर साझा किए थे, जिनका मिलान करने पर एजेंसी ने पाया कि मनीषा हवलदार के पास मौजूद प्रश्नपत्र पूरी तरह से नीट-यूजी परीक्षा के असली फिजिक्स पेपर से मेल खाता था, जिससे उनकी संलिप्तता पूरी तरह सिद्ध हो गई।
विनेश फोगाट को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ी राहत: ‘मां बनना अपराध नहीं’
दिल्ली हाईकोर्ट ने महिला पहलवान विनेश फोगाट को आगामी एशियाई खेलों के चयन ट्रायल में हिस्सा लेने की अनुमति देते हुए एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की पीठ ने भारतीय कुश्ती महासंघ को कड़ी फटकार लगाते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि मातृत्व देश में सम्मान का विषय है और मां बनना कोई अपराध नहीं है।
अदालत ने महासंघ को निर्देश दिया है कि वे बदले की भावना को छोड़कर केवल खेल-हित में काम करें और विनेश के मूल्यांकन के लिए विशेषज्ञों का एक विशेष पैनल गठित करें। अदालत ने इस बात पर भी हैरानी जताई कि जुलाई 2025 में मां बनने के बाद घरेलू स्पर्धाओं में शानदार वापसी करने वाली और अंतर्राष्ट्रीय संस्था से मंजूरी प्राप्त खिलाड़ी को केवल महासंघ की आंतरिक मुकदमेबाजी के कारण खेलने से रोका जा रहा था, जो कि पूरी तरह अनुचित है।

