भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने पश्चिम एशिया संकट के कारण उत्पन्न हुई वैश्विक और घरेलू आर्थिक चुनौतियों के बीच केंद्र सरकार को एक बहुत बड़ी वित्तीय राहत दी है। केंद्रीय बैंक वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए सरकार को रिकॉर्ड 2.87 लाख करोड़ रुपये का लाभांश हस्तांतरित करने जा रहा है, जो कि पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में दिए गए 2.69 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले 6.7 प्रतिशत अधिक है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों की वजह से लगातार बढ़ते आयात बिल और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आ रहे व्यवधानों के इस मुश्किल दौर में, आरबीआई से मिलने वाली यह भारी-भरकम राशि भारतीय सरकारी खजाने को मजबूत करने और राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने में बेहद मददगार साबित होगी।
केंद्रीय बैंक की शुद्ध आय में ऐतिहासिक उछाल
इस रिकॉर्ड लाभांश हस्तांतरण की पृष्ठभूमि में रिजर्व बैंक की मजबूत कमाई रही है, जिसके तहत जोखिम प्रावधान और वैधानिक कोष में जरूरी रकम ट्रांसफर करने से पहले आरबीआई की शुद्ध आय वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 3.96 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गई है।
वित्तीय मोर्चे पर आई यह तेजी पिछले साल के मुकाबले काफी शानदार है, क्योंकि वर्ष 2024-25 में बैंक की शुद्ध आय 3.13 लाख करोड़ रुपये दर्ज की गई थी। इसके साथ ही, 31 मार्च तक आरबीआई की कुल बैलेंस शीट में भी 20.61 प्रतिशत की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसके बाद केंद्रीय बैंक का कुल बैलेंस शीट आकार बढ़कर 91,97,121.08 करोड़ रुपये के सर्वकालिक उच्च स्तर पर जा पहुंचा है, जो देश की बैंकिंग प्रणाली की स्थिरता को दर्शाता है।

