केंद्र सरकार ने देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए पहली बार देश भर के अस्पतालों में गहन चिकित्सा इकाइयों यानी ICU के लिए एक समान मानक तय कर दिए हैं। अब तक देश में आईसीयू के संचालन के लिए कोई निश्चित राष्ट्रीय मानक नहीं थे, जिसकी वजह से अलग-अलग अस्पतालों में सुविधाओं और इलाज की गुणवत्ता में बड़ा अंतर रहता था। स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशालय द्वारा जारी इन नए दिशानिर्देशों के तहत अब हर आईसीयू को उसकी सुविधाओं के आधार पर तीन अलग-अलग स्तरों में वर्गीकृत किया जाएगा। इस ऐतिहासिक फैसले का मुख्य उद्देश्य अस्पतालों में मौजूद असमानता को खत्म करना और गंभीर मरीजों को एक निश्चित स्तर का इलाज सुनिश्चित करना है, जिससे भविष्य में आईसीयू के बिल की दरें भी इन्हीं मानकों के आधार पर तय की जा सकेंगी।
तीन स्तरों में बांटे जाएंगे ICU
सरकार की नई योजना के अनुसार, देश के आईसीयू को तीन स्तरों में बांटा जाएगा ताकि मरीजों को उनकी स्थिति की गंभीरता के अनुसार सही इलाज मिल सके। पहले स्तर के आईसीयू का मुख्य कार्य गंभीर मरीज को शुरुआती आपातकालीन इलाज देकर उनकी स्थिति को स्थिर करना होगा, जिसमें कम से कम छह बिस्तर और एक वेंटिलेटर होना अनिवार्य है। दूसरे स्तर पर बिस्तरों की संख्या बढ़कर कम से कम आठ होगी और यहाँ केंद्रीय ऑक्सीजन व्यवस्था के साथ आधे बिस्तरों पर वेंटिलेटर और किडनी से जुड़ी आपातकालीन सुविधाएं उपलब्ध होंगी। वहीं, तीसरे स्तर के आईसीयू सबसे उन्नत होंगे, जहाँ अंगों के फेल होने जैसी अति-गंभीर स्थितियों का इलाज किया जाएगा और यहाँ पोर्टेबल सीटी स्कैन व उन्नत निगरानी प्रणाली जैसी उच्च स्तरीय मशीनें मौजूद रहेंगी।
नए मानकों की आवश्यकता और स्वास्थ्य क्षेत्र पर प्रभाव
इन समान मानकों को लागू करने की आवश्यकता कोविड-19 महामारी के दौरान विशेष रूप से महसूस की गई थी, जब ऑक्सीजन, वेंटिलेटर और प्रशिक्षित विशेषज्ञों की भारी कमी ने पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था की कमियों को उजागर कर दिया था। कई निजी अस्पतालों में बिना उचित विशेषज्ञता और मशीनों के भी आईसीयू का संचालन किया जा रहा था, जिस पर अब नए नियमों से लगाम लगेगी। यह फैसला देश के करीब 71,000 अस्पतालों और लाखों डॉक्टरों पर लागू होगा। अस्पतालों के डिजाइन को लेकर भी सख्त निर्देश दिए गए हैं कि आईसीयू को आपातकालीन विभाग और ऑपरेशन थिएटर के करीब बनाया जाए ताकि कीमती समय बचाया जा सके। हर बिस्तर पर मल्टी-पैरामीटर मॉनिटर लगाना अब अनिवार्य होगा, जिससे मरीजों की लगातार और सटीक निगरानी संभव हो पाएगी।

