बीमा क्लेम में सर्वे का ‘खेल’, उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनियों की मनमानी पर कसी नकेल

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राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बीमा क्लेम के भुगतान में कंपनियों द्वारा किए जा रहे बड़े खेल का पर्दाफाश किया है। आयोग ने पाया कि बीमा कंपनियां और सर्वेयर मिलकर क्लेम की राशि को कम करने के उद्देश्य से आंकड़ों में जानबूझकर हेराफेरी करते हैं, जिसे आयोग ने उपभोक्ताओं के हक पर ‘डाका’ करार दिया है। सुनवाई के दौरान यह सामने आया कि सर्वे रिपोर्ट में बिना किसी ठोस आधार के कटौती की जाती है, जिससे पीड़ितों को उनका जायज हक नहीं मिल पाता। इस गंभीर मुद्दे पर सख्त रुख अपनाते हुए आयोग ने बीमा दावों के निपटारे में पारदर्शिता लाने और उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा करने की दिशा में कड़े फैसले सुनाए हैं।

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उत्तरकाशी और नैनीताल के मामलों में मनमानी का खुलासा

आयोग के सामने आए दो प्रमुख मामलों में कंपनियों की बड़ी गड़बड़ी पकड़ी गई है। पहले मामले में, उत्तरकाशी के एक गोदाम में आग लगने से हुए नुकसान के क्लेम को सर्वेयर ने ‘डेड स्टॉक’ और ‘वैरिएशन’ के नाम पर भारी कटौती कर बहुत कम कर दिया था, जिसे आयोग ने अनुचित मानते हुए कंपनी को अतिरिक्त राशि ब्याज सहित देने का आदेश दिया। दूसरे मामले में, नैनीताल की एक दुर्घटनाग्रस्त कार के कबाड़ की कीमत सर्वे रिपोर्ट के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग दर्शाई गई थी ताकि क्लेम राशि घटाई जा सके। आयोग ने इस जालसाजी को पकड़ते हुए न केवल भुगतान की राशि बढ़ाई, बल्कि कंपनियों पर मुआवजा देने का भी आदेश जारी किया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि सर्वेयर की मनमानी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।