उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश में तेजी से गिरते भूजल स्तर को देखते हुए अब इसके व्यावसायिक उपयोग पर नकेल कसने का फैसला किया है। नई व्यवस्था के तहत आवासीय अपार्टमेंट, ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों और उद्योगों में बोरिंग या ट्यूबवेल से पानी निकालने पर वॉटर मीटर लगाए जाएंगे। अब इन इकाइयों को मुफ्त पानी की सुविधा नहीं मिलेगी, बल्कि हर महीने उनके द्वारा उपयोग किए गए पानी के आधार पर शुल्क वसूला जाएगा। सिंचाई विभाग को इन मीटरों को लगाने और बिल वसूलने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। हालांकि, सरकार ने राहत देते हुए कृषि कार्यों के लिए इस्तेमाल होने वाले भूजल को फिलहाल इस टैक्स व्यवस्था से पूरी तरह बाहर रखा है।
वार्षिक वृद्धि का प्रावधान
सरकार द्वारा तय की गई दरों के अनुसार, व्यावसायिक इकाइयों और हाउसिंग सोसायटियों पर उनकी खपत के आधार पर अलग-अलग शुल्क लागू होंगे। अपार्टमेंट और हाउसिंग सोसायटियों में 25 घनमीटर से अधिक मासिक खपत होने पर दो रुपये प्रति घनमीटर की दर से टैक्स देना होगा, जबकि उद्योगों और व्यावसायिक इकाइयों पर यह शुल्क एक रुपये से लेकर 120 रुपये प्रति घनमीटर प्रतिदिन तक हो सकता है। यह नियम केवल वर्तमान दरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें हर साल अप्रैल के महीने में पांच प्रतिशत की वृद्धि करने का भी प्रावधान किया गया है। प्रमुख सचिव सिंचाई ने इन आदेशों को तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दे दिए हैं, जिसका उद्देश्य जल संरक्षण और संसाधनों का सही प्रबंधन सुनिश्चित करना है।

