प्रधानमंत्री ने देशवासियों से आग्रह किया है कि जिस तरह कोरोना काल में हमने एकजुट होकर संकट का सामना किया था, वैसी ही अनुशासन की जरूरत अब फिर से है। दुनिया के मौजूदा हालात, विशेषकर पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध जैसे तनाव के कारण पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों में भारी उछाल आने की आशंका है। ऐसे में यह जरूरी है कि हम ईंधन का इस्तेमाल बहुत सोच-समझकर करें। प्रधानमंत्री ने सुझाव दिया है कि लोग कार पुलिंग का सहारा लें, ज्यादा से ज्यादा मेट्रो का उपयोग करें और संभव हो तो वर्क फ्रॉम होम या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसी व्यवस्थाओं को फिर से अपनाएं ताकि सड़कों पर वाहनों का दबाव और ईंधन की खपत कम हो सके।
आर्थिक मजबूती के लिए सोने और विदेशी उत्पादों से दूरी
देश की विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने और आर्थिक सेहत को दुरुस्त रखने के लिए प्रधानमंत्री ने एक साल तक सोने की गैर-जरूरी खरीदारी से बचने की सलाह दी है। उनका कहना है कि सोने के आयात पर देश का काफी पैसा खर्च होता है, जिसे बचाकर हम अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सकते हैं। इसके साथ ही उन्होंने ‘स्वदेशी’ अपनाने पर जोर दिया है। उन्होंने अपील की है कि लोग विदेश यात्राओं को फिलहाल टाल दें और उसके बजाय घरेलू पर्यटन को बढ़ावा दें। साथ ही, दैनिक जीवन में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं, जैसे जूते-कपड़े आदि के लिए केवल स्थानीय उत्पादों को ही प्राथमिकता दें ताकि देश का पैसा देश के भीतर ही रहे।
खेती और खान-पान में बदलाव का आह्वान
प्रधानमंत्री ने केवल ईंधन ही नहीं, बल्कि खाद्य तेल और उर्वरकों (खाद) के उपयोग में भी कटौती करने की बात कही है। उन्होंने किसानों से अनुरोध किया है कि वे रासायनिक खाद का इस्तेमाल कम करके प्राकृतिक खेती की ओर कदम बढ़ाएं और डीजल पंप की जगह सोलर पंप का इस्तेमाल करें। वहीं आम नागरिकों से कहा गया है कि वे खाद्य तेल का सीमित उपयोग करें, जिससे न केवल देश का आयात बिल कम होगा बल्कि लोगों का स्वास्थ्य भी बेहतर रहेगा। इस पूरी अपील का मूल उद्देश्य सामूहिक जनभागीदारी के जरिए वैश्विक संकट के इस दौर में भारत को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सुरक्षित रखना है।

