उत्तराखंड सरकार ने सेना से चार साल की सेवा पूरी कर लौटने वाले अग्निवीरों को राज्य की सरकारी सेवाओं में शामिल करने की कवायद तेज कर दी है। वर्ष 2027 में अग्निवीरों की पहली खेप वापस लौटेगी, जिसके लिए शासन स्तर पर विभिन्न विभागों से खाली पड़े और भविष्य में रिक्त होने वाले पदों का ब्यौरा मांगा जा रहा है। सरकार का मानना है कि सेना से प्रशिक्षित ये युवा न केवल अनुशासित होंगे, बल्कि तकनीकी दक्षता और आपदा प्रबंधन जैसे कौशलों में भी माहिर होंगे, जिसका सीधा लाभ राज्य के विभिन्न सरकारी विभागों को मिलेगा। इस योजना के माध्यम से प्रदेश के युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने और सरकारी तंत्र में कुशल कार्यबल को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
विभिन्न विभागों में रिक्तियों का आकलन और डेटा संकलन
अग्निवीरों को रोजगार देने के लिए उत्तराखंड शासन ने पुलिस, परिवहन, आपदा प्रबंधन, वन, होमगार्ड और कारागार जैसे प्रमुख विभागों में रिक्त पदों का आंकड़ा जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। गृह सचिव शैलेश बगौली के अनुसार, प्रदेश में पहले ही अग्निवीरों के लिए 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण लागू किया जा चुका है और अब इसी आरक्षण के दायरे में आने वाले संभावित पदों की गणना की जा रही है। केंद्र सरकार के निर्देशों के बाद अब राज्य सरकार इस बात का विस्तृत आकलन कर रही है कि आने वाले वर्षों में किन-किन विभागों में कितने अग्निवीरों को नियुक्त किया जा सकेगा, ताकि उनके वापस लौटते ही समायोजन की प्रक्रिया शुरू हो सके।
अग्निपथ योजना और भविष्य की संभावनाएं
केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2023 में शुरू की गई अग्निपथ योजना के तहत युवाओं को चार वर्ष के लिए सेना में सेवा का अवसर दिया जा रहा है, जिसमें से 25 प्रतिशत को सेना में स्थायी नियुक्ति मिलेगी, जबकि शेष 75 प्रतिशत को अन्य क्षेत्रों में समायोजित किया जाना है। एक अनुमान के मुताबिक, उत्तराखंड के 4,500 से अधिक युवा वर्तमान में सेना में अग्निवीर के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। केंद्र सरकार ने भी सभी राज्यों से इस संबंध में जानकारी मांगी है कि उन्होंने इन युवाओं के पुनर्व्यवस्थापन के लिए क्या ठोस कदम उठाए हैं, जिससे इनके सैन्य प्रशिक्षण और अनुशासन का लाभ नागरिक सेवाओं में लिया जा सके।

